
जोधपुर 27 अगस्त (Udaipur Kiran) । जैन समाज ने बुधवार को पर्युषण पर्व के अंतिम दिन क्षमापना का संवत्सरी पर्व मनाया। इस दौरान जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए मिच्छामि दुक्कड़म कहकर क्षमा मांगी और भगवान की भक्ति की गई। वहीं धार्मिक स्थलों और स्थानकों में भी कई कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। समाज के लोगों ने मौन उपवास, बिना जल के उपवास, आयंबिल आदि में से कोई एक तप किया। साथ ही जैन मंदिरों व चातुर्मास में विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। जैन धार्मिक स्थलों पर संतों-साध्वीवृंद के सान्निध्य में सभी श्रावक-श्राविकाओं ने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से हुए पापों एवं भूल के लिए क्षमायाचना की।
भैरू बाग तीर्थ में साध्वी अर्चितगुणाश्री के सानिध्य में क्षमा एवं मैत्री का परिचायक संवत्सरी महापर्व जप, तप, त्याग, साधना, आराधना, सांवत्सरिक प्रतिक्रमण एवं पौषध जैसी धार्मिक क्रियाएं करते हुए उत्साह एवं उमंग के वातावरण में मनाया गया। तीर्थ के प्रवक्ता दिलीप जैन एवं सचिव जगदीश गांधी ने बताया कि इस अवसर पर महेंद्र, ममता, दीक्षांत एवं राशिका भंडारी परिवार ने गुरुवर्या को बारसा सूत्र वहराया। इसके पश्चात गुरुवर्या द्वारा सूत्र का वाचन किया गया। जिसे श्रद्धालुओं ने अंतर्मन की गहराइयों से ध्यान पूर्वक अक्षरश: श्रवण किया। तीर्थ के अध्यक्ष गणेश भंडारी एवं सह सचिव सुनील सिंघवी ने बताया कि श्रद्धालुओं ने संपूर्ण दिवस त्याग एवं तपस्या के साथ विभिन्न धार्मिक आराधनाओं में रत रहते हुए सायंकालीन सांवत्सरिक प्रतिक्रमण किया। प्रतिक्रमण दौरान सभी ने 84 लाख जीव योनि से जाने अनजाने में मन, वचन एवं काया से हुए पापों के लिए क्षमा मांगते हुए प्रायश्चित लिया।
चौरडिय़ा भवन में उमड़ी भीड
चौरडिय़ा भवन में बुधवार को संवत्सरी महापर्व विभिन्न कार्यक्रमों के साथ श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर सुबह 6.15 से 7.15 ज्ञान चर्चा तथा 8.30 से प्रवचन, दोपहर को आलोचना पाठ में श्रावकों की भीड़ उमड़ पड़ी। आज चार दर्जन से अधिक तपस्वियों ने अठाई की तपस्या ग्रहण की। सुमित मुनि ने संवत्सरी पर्व के महत्व के बारे में जानकारी दी। जयमल जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष देवराज बोहरा ने बताया कि आज सैकड़ों श्रावक श्राविकाओं ने उपवास, एकासना, आंबिंल कर धार्मिक आराधना की। कईयों श्रावक श्राविकाओं द्वारा पंद्रह, नौ, उपवास रखें गए।
श्री साधुमार्गी जैन परम्परा
श्री साधुमार्गी जैन परम्परा के सन्त आचार्य रामेश की आज्ञानुवर्ती साध्वियों के सान्निध्य में संवत्सरी महापर्व आज जोधपुर के चारों चातुर्मास स्थलों पर भव्यता एवं श्रद्धा के साथ मनाया गया। समता भवन आचार्य नानेश मार्ग पर शासन दीपिका साध्वी मुक्तिप्रभा महाराज, महामन्दिर स्थित आचार्य उदयसागर समता भवन में शासन दीपिका साध्वी कुसुमकान्ता महाराज, जैन स्थानक कोठारी भवन सरदारपुरा में शासन दीपिका साध्वी काव्ययशाश्री महाराज और सुराणा भवन पाल रोड रूपनगर, अरिहंत नगर में शासन दीपिका साध्वी मननप्रज्ञा महाराज यही संवत्सरी का महत्व बताया। इस अवसर पर अध्यक्ष भागचन्द सिंगी, पूर्व अध्यक्ष करनीदान पटवा, पारसमल सांखला, नेमीचन्द पारख, जसराज चौपड़ा, बहादुरचन्द मणोत, महामंत्री सुरेश सांखला, पूर्व राष्ट्रीय मंत्री गुलाब चौपड़ा, राष्ट्रीय मंत्री तनसुख जैन, महिला मंडल अध्यक्ष मन्जु चौपड़ा, बहुमंडल अध्यक्ष शालिनी सिंगी, ललिता कोटडिय़ा, संघ अध्यक्ष रमेश मालू सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे एवं अपने भाव रखे।
श्री मुहताजी मंदिर नागौरी गेट
पर्युषण पर्व की आराधना के अंतिम दिन श्री मुहताजी मंदिर प्रांगण में भगवान महावीर स्वामी की मूल वाणी पर आधारित बारसा सूत्र का वाचन साध्वी माताजी महाराज की पावन मौजूदगी में प्रवचनकार साध्वी पीयूषपूर्णा श्रीजी महाराज एवं साध्वी नमनपूर्णा महाराज ने अपनी मधुर वाणी से किया। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष संजय मेहता एवं सचिव पवन मेहता ने बताया कि वाचन से पूर्व पावन सूत्रों को विधिविधान एवं मंत्रोच्चार से वोहराने का सौभाग्य स्व. पुष्पा राजेंद्र एस. मेहता के परिजनों आदि ने प्राप्त किया। वहीं अष्टप्रकारी पूजा का लाभ दंपती मंजू संदीप मेहता को मिला।
श्री नवकार जैन सोसायटी
श्री नवकार जैन सोसायटी द्वारा आयोजित क्षमा विरस्य भूषण संगोष्ठी में प्रवक्ता धनराज विनायकिया ने कहा कि संवत्सरी पर्व अध्यात्म और संस्कृति का अलौकिक पर्व है, जो जीवन की निर्मलता, प्रकाश और ज्योति से दीप स्तंभ का निर्माण करता है। उन्होंने सभी से क्षमा याचना करते हुए कहा कि भूलों और गलतियों के लिए क्षमा मांगने से मनुष्य को सभी तीर्थों का फल भी प्राप्त हो सकता है। इस अवसर पर सोसायटी अध्यक्ष गोपाल भंडारी, गौतम सिंघवी सहित संस्था के कई पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।
(Udaipur Kiran) / सतीश
