RAJASTHAN

नवीनतम प्रौद्योगिकी के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ-आईटी मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़

आईटी टीम के साथ मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़

जयपुर, 26 अगस्त (Udaipur Kiran) । ‘राजकिसान साथी’ परियोजना को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सीआईपीएस इनोवेशन अवार्ड मिलने के बाद प्रोजेक्ट की टीम ने सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ से शिष्टाचार भेंट की। कर्नल राठौड़ ने सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग की टीम को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं और विभाग को नवीनतम प्रौद्योगिकी के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सहायक बनने के निर्देश दिए।

कर्नल राठौड़ ने इस उपलब्धि पर टीम को बधाई देते हुए निर्देश दिए कि भविष्य में भी सभी एप्लिकेशंस में नवीनतम तकनीकों को सम्मिलित करते हुए राज्य को आईटी के क्षेत्र में देश का मॉडल राज्य बनाया जाए। उन्होंने कहा कि ‘राजकिसान साथी’ परियोजना जैसे नवाचारों के माध्यम से न केवल किसानों को सशक्त किया जाए, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी प्रौद्योगिकी का उपयोग कर जनकल्याणकारी योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार और डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देकर राजस्थान को देश में अग्रणी बनाना हमारा लक्ष्य है।

आईटी मंत्री कर्नल राठौड़ ने विभाग को निर्देश दिए कि आमजन तक योजनाओं की पहुंच को सरल, पारदर्शी और त्वरित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग और अधिक व्यापक स्तर पर किया जाए। उन्होंने कहा कि ‘राजकिसान साथी’ परियोजना का यह पुरस्कार न केवल विभाग की मेहनत और समर्पण का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि तकनीक के सही उपयोग से समाज के हर वर्ग तक विकास का लाभ पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे इस उपलब्धि को प्रेरणा के रूप में लें और भविष्य में और अधिक नवाचारों के साथ राज्य के विकास में योगदान दें।

इस अवसर पर ‘राजकिसान साथी’ की प्रभारी अधिकारी एवं सिस्टम एनालिस्ट (संयुक्त निदेशक) श्रीमती मोनिका चौधरी ने परियोजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘राजकिसान साथी’ एक एकीकृत ऑनलाइन सिंगल विंडो पोर्टल है, जो ‘कृषि को सरल बनाने’ की अवधारणा को साकार कर रहा है। राजस्थान इस तरह का समन्वित ढांचा विकसित करने वाला देश का पहला राज्य है।

उन्होंने जानकारी दी कि यह पोर्टल कृषि और संबद्ध विभागों के 120 से अधिक मॉड्यूल्स को पूरी तरह डिजिटल, कागज रहित और पारदर्शी प्रणाली के माध्यम से उपलब्ध कराता है। इस प्रणाली ने 1320 टन कागज की बचत, डीबीटी भुगतानों में 33 गुना वृद्धि, आवेदनों की रियल-टाइम ट्रैकिंग और डिजिटलीकरण के जरिए धोखाधड़ी में कमी जैसे उल्लेखनीय नतीजे दिए हैं। जियो-टैग्ड सत्यापन, एआई/एमएल आधारित फसल रोग प्रबंधन, ऑनलाइन लाइसेंसिंग और किसानों तक बीज मिनीकिट की डिलीवरी जैसे नवाचारों ने कृषि सेवा वितरण में दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ाया है।

इसके तहत अब तक 73 लाख से अधिक किसान जुड़ चुके हैं, 3,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि डीबीटी के जरिए वितरित की गई है, 1 लाख से अधिक लाइसेंस जारी किए गए हैं, 58,000 से ज्यादा कृषि छात्राओं को 100 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्तियां दी गई हैं, और राजएग्रीक्यूसी ऐप के माध्यम से 1.1 लाख से अधिक नमूनों का परीक्षण किया गया है। साथ ही, 1,700 पूंजीगत निवेशों को सहायता प्रदान की गई है और 2,500 से अधिक खरीदारों व विक्रेताओं को जोड़ा गया है।

यह पोर्टल किसानों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजनाओं, लाइसेंसिंग, गुणवत्ता नियंत्रण, डिजिटल परामर्श और अन्य सेवाओं तक आसान पहुंच प्रदान करता है। इसकी उत्कृष्ट प्रथाओं को डीएआरपीजी की ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ पुस्तिका और सीआईपीएस कॉफी टेबल बुकलेट में शामिल किया गया है, साथ ही इसे 28वें राष्ट्रीय सुशासन सम्मेलन में प्रदर्शित किया गया है। मध्यप्रदेश और उत्तराखंड के अधिकारियों ने इस मॉडल का अध्ययन कर इसे अपनाने में रुचि दिखाई है। राजकिसान साथी को कई प्रतिष्ठित सम्मान भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें स्कॉच अवॉर्ड्स, राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस अवॉर्ड 2023-24 (सिल्वर श्रेणी), और प्रधानमंत्री उत्कृष्ट लोक प्रशासन अवॉर्ड (फाइनलिस्ट) शामिल हैं।

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(Udaipur Kiran) / अखिल

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