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छत्तीसगढ़ के 32 सौ करोड़ रुपये के शराब घोटाले में जांच एजेंसियों ने किया विशेष अदालत में छठवां आरोप पत्र दाखिल

छत्तीसगढ़ का शराब  घोटाला (प्रतीकात्मक चित्र )

– शराब घोटाले के पूरे सिंडिकेट के तौर-तरीकों का किया खुलासा

रायपुर, 26 अगस्त (Udaipur Kiran) । छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती कांग्रेस की भूपेश सरकार के दौरान हुए 32 सौ करोड़ के शराब घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने आज (मंगलवार) रायपुर की विशेष अदालत में छठवां आरोप पत्र दाखिल किया। जांच एजेंसी ने अपनी छठी चार्जशीट में शराब घोटाले के पूरे सिंडिकेट के तौर-तरीकों के बारे में बताया। इसमें कहा गया है कि वर्षों तक सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर अरबों रुपये का घोटाला किया गया। एजेंसी के अनुसार वर्ष 2020-21 में राज्य सरकार द्वारा विदेशी शराब की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा निजी कंपनियों को देने से लगभग 248 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है।

इसके अनुसार, तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी और अरविंद सिंह तथा अन्य आरोपितों ने मिलकर एक संगठित संगठन बनाया और इसके माध्यम से सरकारी शराब की दुकानों की आपूर्ति पर कमीशन, अतिरिक्त शराब उत्पादन की अवैध बिक्री और विदेशी शराब की अवैध वसूली की व्यवस्था की गई। जांच के दौरान यह भी बात सामने आई कि वर्ष 2020-21 में नई शराब नीति लागू की गई। इन तीन निजी कंपनियों में शामिल ओम साईं बेवरेज से जुड़े विजय कुमार भाटिया को छिपा हुआ लाभार्थी घोषित किया गया है। विजय कुमार भाटिया इस कंपनी के लाभ का 52 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त करते थे।जांच में लगभग ₹14 करोड़ की राशि उनके नाम से जुड़ी मिली है। वहीं नेक्सजेन पावर इंजिटेक प्रा. लि से जुड़े संजय मिश्रा मनीष मिश्रा और अभिषेक सिंह को लगभग 11 करोड़ रुपये का लाभ हुआ। दिशिता वेंचर्स प्रा. लि. के मालिक आशीष सौरभ केडिया, एक पूर्व शराब प्रमोटर है।

आरोप पत्र पेश करते हुए आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने अदालत को बताया कि पहले विदेशी शराब ब्रेवरेज कॉर्पोरेशन के ज़रिए राज्य बाजार तक पहुंचती थी, जिससे राजस्व सरकार के खाते में जाता था। वर्ष 2020–21 में नई आबकारी नीति लागू कर सरकारी प्रक्रियाओं को एक तरफ कर तीन निजी कंपनियों को सीधे लाइसेंस दिए गए। इन कंपनियों द्वारा शराब में 10 प्रतिशत मार्जिन लगाकर बिक्री की गई और इसे एफएल-10ए लाइसेंसिंग प्रक्रिया के ज़रिए वैध दिखाया गया। आरोप पत्र में बताया गया कि सिंडिकेट के करीबी अधिकारियों ने बिना जांच-पड़ताल या कानून प्रक्रिया के सब कुछ मंजूर करवाया। यह सिंडिकेट 2020 से 2023 तक सक्रिय है और इसे राजनीतिक एवं प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त था।

अब तक छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अनिल टुटेजा, अरुण पट्टी त्रिपाठी, अनवर निरंजन दास, विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह समेत कई नेताओं और कारोबारियों के नाम सामने आ चुके हैं। विजय कुमार भाटिया, संजय मिश्रा मनीष मिश्रा और अभिषेक सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है।

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(Udaipur Kiran) / केशव केदारनाथ शर्मा

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