
चेन्नई, 28 अगस्त (Udaipur Kiran) । मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को अभिनेता रजनीकांत की फिल्म ‘कुली’ के निर्माता सन पिक्चर्स द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में फिल्म को दिए गए ‘ए’ प्रमाणपत्र को चुनौती दी गई थी।केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने फिल्म ‘कुली’ को ‘ए’ (केवल वयस्कों के लिए) सर्टिफिकेट दिया है। इसका विरोध करते हुए फिल्म की प्रोडक्शन कंपनी ‘सन पिक्चर्स’ ने मद्रास उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की। इसमें कहा गया कि ए सर्टिफिकेट के कारण बच्चों को सिनेमाघरों में जाने की अनुमति नहीं है। इससे सिनेमाघरों में आने वाले दर्शकों की संख्या में कमी आई है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। 30 साल से ज़्यादा समय से रजनीकांत की किसी भी फिल्म को ए सर्टिफिकेट नहीं दिया गया है इसलिए सेंसर बोर्ड को फिल्म को यू/ए प्रमाणपत्र देने का आदेश दिया जाना चाहिए।
जब पिछली बार यह मामला न्यायमूर्ति तमिलसेल्वी के समक्ष सुनवाई के लिए आया था, तब सेंसर बोर्ड ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसमें कहा गया था कि फिल्म कुली में अत्यधिक मारधाड़ वाले दृश्य, शराब, धूम्रपान के दृश्य और अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है इसलिए, सेंसर बोर्ड की समीक्षा समिति ने फिल्म को ‘ए’ प्रमाणपत्र देने की सिफारिश की थी। यह बताया गया था कि यदि फिल्म की टीम दृश्यों में कुछ बदलाव करती है, तो यू/ए प्रमाणपत्र जारी किया जा सकता है। फिल्म की टीम ने कहा कि वे ‘ए’ प्रमाणपत्र स्वीकार करेंगे। याचिकाकर्ता का यह दावा कि बहुत अधिक मारधाड़ वाले दृश्यों वाली फिल्मों को भी यू/ए प्रमाणपत्र दिया गया है, स्वीकार नहीं किया जा सकता। मारधाड़ दृश्यों वाली फिल्म को कई पहलुओं की जांच के बाद यू/ए प्रमाणपत्र दिया गया था। चूंकि यह ‘कुली’ फिल्म पर लागू नहीं होता, इसलिए यह सूचित किया गया कि इस फिल्म को यू/ए प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सकता।
इसके बाद निर्माण कंपनी सन पिक्चर्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्रन ने कहा कि फिल्म से अभद्र भाषा हटा दी गई है। कुछ जगहों पर इसे म्यूट कर दिया गया है। शराब की बोतलों वाले दृश्य छिपा दिए गए हैं। सेंसर बोर्ड द्वारा बताई गई शर्तों का पालन किया गया है। अगर सेंसर बोर्ड ऐसा अनुरोध करता है, तो हम फिल्म से जरूरी दृश्य हटाने को तैयार हैं। फिल्म रिलीज होने के बाद भी हमें सर्टिफिकेट बदलने का कानूनी अधिकार है।
इसके बाद, सेंसर बोर्ड की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि चूंकि एक मजदूर की गतिविधियों को दर्शाने वाले किरदार में हिंसा के दृश्य बहुत ज़्यादा हैं, इसलिए केवल ‘ए’ सर्टिफिकेट ही दिया जा सकता है। सेंसर बोर्ड ने ‘ए’ सर्टिफिकेट इसलिए दिया क्योंकि फिल्म बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है क्योंकि इसमें शुरू से अंत तक लड़ाई के दृश्य हैं। इसे बदला नहीं जा सकता। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने बिना कोई तारीख बताए मामले में फैसला स्थगित कर दिया। ऐसे में मामला आज (28 अगस्त) सुनवाई के लिए आया। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश तमिलचेलवी थीप्पला ने सन पिक्चर्स द्वारा दायर याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि फिल्म को यू/ए प्रमाणपत्र देने का कोई आधार नहीं है।
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(Udaipur Kiran) / Dr. Vara Prasada Rao PV
