
कठुआ 23 अगस्त (Udaipur Kiran) । राजकीय डिग्री कॉलेज महानपुर ने चंद्रयान-3 के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग की भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में दूसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस बड़े गर्व से मनाया।
कार्यक्रम का आयोजन भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो. बिंती शर्मा ने प्राचार्य डॉ. संगीता सूदन के मार्गदर्शन में किया, जिन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उल्लेखनीय यात्रा पर एक ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिया। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस का विषय था आर्यभट्ट से गगनयान प्राचीन ज्ञान से अनंत संभावनाओं तक। अपने संबोधन में प्रो. बिंती शर्मा ने 1960 के दशक में थुंबा में अपनी साधारण शुरुआत से लेकर आर्यभट्ट, चंद्रयान, मंगलयान, आदित्य-एल1 और आगामी गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन जैसे अभियानों के साथ अंतरिक्ष अन्वेषण में वैश्विक नेता बनने तक भारत की प्रगति का वर्णन किया। उन्होंने डॉ. विक्रम साराभाई, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, डॉ. सतीश धवन और डॉ. यूआर राव जैसे भारतीय वैज्ञानिकों के अमूल्य योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा केवल पुरुष वैज्ञानिकों द्वारा ही नहीं, बल्कि महिलाओं द्वारा भी समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई है। उन्होंने चंद्रयान और मंगलयान जैसे अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली ऋतु करिधाल और एम वनिता जैसी वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना की। उन्होंने विदेश में भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया, जिन्होंने अपने साहस और समर्पण से दुनिया भर की पीढ़ियों को प्रेरित किया है। अपने व्याख्यान का समापन करते हुए, उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा हमें एक बात स्पष्ट रूप से बताती है कि दूरदर्शिता, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से कुछ भी असंभव नहीं है। साइकिल पर छोटे रॉकेट लॉन्च करने से लेकर चंद्रमा पर उतरने तक, हमारे वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब प्रयास के साथ सपने पूरे किए जाते हैं, तो वे इतिहास बन जाते हैं।
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(Udaipur Kiran) / सचिन खजूरिया
