Uttar Pradesh

लोकतंत्र जन सहभागिता, समानता और स्वतंत्रता का आधार : प्रो वीके राय

प्रशिक्षण कार्यक्रम में वक्तागण

-जन भागीदारी और सामूहिक निर्णय से ही शासन स्थायी और न्यायपूर्ण : प्रो आनंद शंकर सिंह

प्रयागराज, 28 अगस्त (Udaipur Kiran) । लोकतंत्र केवल शासन की एक पद्धति नहीं, बल्कि यह जन सहभागिता, समानता और स्वतंत्रता का आधार है। जब जनता को निर्णय-प्रक्रिया में शामिल किया जाता है, तभी शासन व्यवस्था पारदर्शी, जवाबदेह और न्यायपूर्ण बनती है। लोकतांत्रिक शासन में सरकार केवल शासक नहीं, बल्कि जनता की सेवक होती है, और इसी कारण लोकतंत्र को“ जनता के लिए, जनता द्वारा और जनता का शासन” कहा गया है।

यह बातें बतौर मुख्य अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय, कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. वी.के राय ने गुरूवार को मालवीय मिशन शिक्षण प्रशिक्षण केंद्र ईश्वर शरण पीजी कॉलेज द्वारा यूजीसी एवं शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार की परियोजना के तहत 12 दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स का शुभारम्भ करते हुए कही।

उन्होंने राजनीति विज्ञान विषय ‘‘लोकतंत्र, शासन और विकास’’ पर प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र की सफलता इस पर निर्भर करती है कि शासन कितना उत्तरदायी और पारदर्शी है। शासन का आशय केवल प्रशासनिक तंत्र से नहीं है, बल्कि इसमें नीति-निर्माण, नागरिकों की भागीदारी, विधि का शासन, भ्रष्टाचार-नियंत्रण और संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण सम्मिलित होता है। अच्छे शासन की पहचान जवाबदेही, पारदर्शिता, जन सहभागिता, कानून का शासन तथा निष्पक्षता और न्याय से होती है। जहां लोकतंत्र मज़बूत होता है, वहां विकास के निर्णय अधिक जनोन्मुखी होते हैं। विकास केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक समानता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और लैंगिक न्याय भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहां शासन व्यवस्था की सफलता इसी में है कि यह समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की किरण पहुँचा सके। पंचायती राज प्रणाली लोकतंत्र को ग्राम स्तर तक ले जाती है, सूचना का अधिकार और ई-गवर्नेंस पारदर्शिता को बढ़ाते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि वास्तव में लोकतंत्र सुशासन को जन्म देता है और सुशासन सतत एवं समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।एमएमटीटीसी के निदेशक एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. आनंद शंकर सिंह ने कहा कि जब हम भारत की महान परम्परा को देखते हैं तो पाते हैं कि लोकतांत्रिक मूल्यों की जड़ें हमारे देश में अत्यंत गहरी रही हैं। वैशाली का गणराज्य इसका जीवंत उदाहरण है। यह केवल इतिहास की एक घटना नहीं, बल्कि यह संदेश है कि जनता की भागीदारी और सामूहिक निर्णय ही शासन को स्थायी और न्यायपूर्ण बनाते हैं।उन्होंने प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि वैशाली के गणराज्य ने उस समय यह सिद्ध कर दिया था कि शक्ति का स्रोत केवल शासक नहीं, बल्कि जनता होती है। यही भावना आज आधुनिक लोकतंत्र का भी आधार है। हमें गर्व होना चाहिए कि लोकतंत्र की यह परम्परा भारत भूमि ने विश्व को दी। यही हमारे लोकतंत्र को और सशक्त बनाएगा। सेंटर के सहायक निदेशक डॉ. मनोज कुमार दूबे ने प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि इस केंद्र से यह 43वां कार्यक्रम चल रहा है और यह हमारे लिए गौरव का क्षण है। कार्यक्रम की रूपरेखा और उपस्थित जनों का स्वागत रिफ़्रेशर कोर्स के संयोजक डॉ. अखिलेश पाल ने तथा धन्यवाद ज्ञापन सहसंयोजक डॉ. विवेक कुमार राय द्वारा किया गया। कार्यक्रम में देश के 18 राज्यों से कुल लगभग 250 प्रतिभागी उपस्थित रहे।

(Udaipur Kiran) / विद्याकांत मिश्र

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