
– कांग्रेस-जमीयत पर साजिश का आरोप
गुवाहाटी, 23 अगस्त (Udaipur Kiran) । असम प्रदेश भाजपा ने एनआरसी पुनः सत्यापन की मांग पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र, राज्य सरकार, एनआरसी कोऑर्डिनेटर और भारत के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी करने के निर्णय का स्वागत किया है।
गुवाहाटी में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में भाजपा प्रवक्ता मोमिनुल ओवाल ने कहा कि अगस्त 2019 में प्रकाशित एनआरसी में कई अनचाहे और अज्ञात लोगों के नाम शामिल हो गए, जिससे अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसने का रास्ता मिला। उन्होंने इस मामले में याचिका दायर करने वाले पूर्व एनआरसी कोऑर्डिनेटर हितेश देव शर्मा का आभार जताया।
ओवाल ने दोहराया कि भाजपा ने पहले ही सीमा से लगे धुबड़ी, मानकाचर, ग्वालपाड़ा और बराक घाटी जिलों में 20 प्रतिशत तथा बरपेटा, दरंग, मोरीगांव और नगांव जैसे आंतरिक जिलों में 10 प्रतिशत नामों के पुनः सत्यापन की मांग की थी। उन्होंने कांग्रेस और जमीयत उलेमा-ए-हिंद पर असम को अस्थिर करने और अवैध घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
भाजपा प्रवक्ता ने याद दिलाया कि 1993 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हितेश्वर सैकिया ने विधानसभा में 30 लाख से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठियों की मौजूदगी स्वीकार की थी, लेकिन जमीयत नेताओं के दबाव में बयान वापस ले लिया। उन्होंने आरोप लगाया, “आज कांग्रेस और जमीयत मिलकर स्वदेशी लोगों के अधिकार कमजोर करने की वही साजिश दोहरा रहे हैं।”
ओवाल ने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में हुए बड़े पैमाने पर बेदखली अभियानों की भी सराहना की, जिनमें लगभग 1.5 लाख बीघा अतिक्रमित भूमि खाली कराई गई। इसे उन्होंने असम की जमीन की रक्षा के लिए “ऐतिहासिक प्रयास” बताया। साथ ही कहा कि जमीयत का इन उपायों का विरोध यह दर्शाता है कि वह “अवैध बांग्लादेशी मुसलमानों” का पक्ष ले रही है।
लाचित बरफूकन की मुगलों के खिलाफ ऐतिहासिक लड़ाई का हवाला देते हुए ओवाल ने कहा कि डॉ. सरमा के नेतृत्व में असम कांग्रेस-जमीयत गठजोड़ को पराजित करेगा। उन्होंने स्वदेशी मुस्लिम समुदायों से भी अपील की कि वे अज्ञात मौलवियों या बाहरी लोगों को गांव-शहरों में शरण न दें।
इस बीच, मुख्यमंत्री सरमा ने अपने इस्तीफे की मांग को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जमीयत नेता मदनी का “असम पर कब्जे का सपना कभी पूरा नहीं होगा” और व्यंग्य करते हुए कहा कि उन्हें “बांग्लादेश भेज देना चाहिए।”
(Udaipur Kiran) / श्रीप्रकाश
