Chhattisgarh

तप से आत्मा होती है शुद्ध : प्रशम सागर

श्री पार्श्वनाथ जिनालय इतवारी बाजार से निकली बरघोड़ा शोभायात्रा।
  बरघोड़ा शोभायात्रा में शामिल समाज की महिलाएं।

धमतरी, 29 अगस्त (Udaipur Kiran) । छत्तीसगढ़ के श्री पार्श्वनाथ जिनालय इतवारी बाजार धमतरी में विराजमान परम पूज्य प्रशम सागर व योगवर्धन महाराज ने पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के अवसर पर शुक्रवार को तप की महत्ता पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि जिनशासन में तप की महिमा अत्यधिक विस्तार से बताई गई है। तप शरीर के माध्यम से होता है, किंतु उसकी शुद्धि आत्मा में होती है। पर्यूषण पर्व में सभी श्रद्धालु तप और आराधना से साधना पथ पर अग्रसर होते हैं।

प्रशम सागर महाराज ने तत्वार्थ सूत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि इच्छाओं का निरोध करना या धीरे-धीरे कम करते हुए समाप्त करना ही वास्तविक तप है। तप आत्मा के गुणों में निखार लाता है और संस्कारों की वृद्धि करता है। अनादिकाल से तीर्थंकरों ने साधनकाल में तप को विशेष महत्व दिया और तप के माध्यम से कर्मों की निर्जरा कर मुक्ति प्राप्त की। उन्होंने बताया कि तप बारह प्रकार के होते हैं_छह बाह्य तप और छह आभ्यंतर तप। बाह्य तप आभ्यंतर तप का प्रवेश द्वार है और इनके माध्यम से ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है।

इस मौके पर भंवरलाल छाजेड़, विजय गोलछा, अशोक राखेचा, रमन लोढ़ा, जीवन लोढ़ा, संजय लोढ़ा, पारसमल गोलछा, प्रकाश पारख, निर्मल बरडिया, धनपत बरडिया, जसराज डागा, प्रकाश बैद, अभय बरडिया, लक्ष्मीलाल लूनिया, अमित लोढ़ा, कुशल चोपड़ा, अंकित बरडिया, प्रतीक बैद, विजय दुग्गड और नितिन बरडिया सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

तपस्वियों का हुआ सम्मान

इस अवसर पर श्रीसंघ की ओर से मणिधारी मित्र मंडल द्वारा अट्ठम तप, तेला, अक्षयनिशी, समवशरण तप, विजय कषायतप आदि तपस्या करने वाले तपस्वियों का सम्मान किया गया। बरडिया परिवार धमतरी की ओर से स्वधर्मी वात्सल्य का आयोजन धनकेशरी मंगल भवन में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए।वीपर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के अवसर पर तप की आराधना, तपस्वियों का सम्मान और बारघोड़ा जैसे धार्मिक आयोजनों ने पूरे समाज में भक्ति, समर्पण और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण निर्मित कर दिया।

तपस्वियों के बहुमान के बाद भव्य बारघोड़ा श्री पार्श्वनाथ जिनालय इतवारी बाजार से निकलकर आदिश्वर जिनालय पहुंचा। इसमें समाजजन उत्साहपूर्वक सम्मिलित हुए और धार्मिक उल्लास का वातावरण निर्मित हुआ।

(Udaipur Kiran) / रोशन सिन्हा

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