
जयपुर, 29 नवंबर (Udaipur Kiran) । टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके तैराक श्रीहरि नटराज ने चल रहे खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स (केआइयूजी) राजस्थान 2025 में अपने शानदार प्रदर्शन से एक बार फिर सुर्खियां बटोरीं। जैन यूनिवर्सिटी की ओर से हिस्सा लेते हुए उन्होंने कुल 11 पदक जीते, जिसमें 9 स्वर्ण और 2 रजत शामिल हैं।
24 वर्षीय नटराज ने स्वीकार किया कि वे अपने श्रेष्ठ टाइमिंग के करीब भी नहीं थे, क्योंकि यह उनका ऑफ-सीजन चल रहा है। हाल ही में अहमदाबाद में हुए एशियन एक्वाटिक्स चैंपियनशिप में सात पदक जीतने के बाद वे पूर्ण रूप से उच्च स्तरीय प्रशिक्षण में नहीं थे, लेकिन फिर भी प्रतियोगिता में काफी आगे रहे और अपनी यूनिवर्सिटी को तैराकी में 45 पदकों (27 स्वर्ण सहित) की बड़ी उपलब्धि दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स पर नजरें
नटराज अब जापान में होने वाले 2026 एशियन गेम्स और ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 पर फोकस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “एशियन गेम्स में मैं 25 साल का हो जाऊंगा और यही उम्र तैराकों के लिए पीक होती है। अब मैं अपने गेम और शरीर को बेहतर समझता हूं, और मुझे पूरा विश्वास है कि मैं वहां पदक जीत सकता हूं।”
टार्गेट एशियन गेम्स ग्रुप में शामिल होने की उम्मीद
श्रीहरि को उम्मीद है कि एशियन एक्वाटिक्स चैंपियनशिप में मिले सात पदकों के आधार पर उन्हें टार्गेट एशियन गेम्स ग्रुप में जगह मिलेगी। उन्होंने कहा, “2018 के पहले खेलो इंडिया गेम्स के बाद मुझे टॉप्स में शामिल किया गया था और उस सहयोग ने मेरे करियर में बड़ा बदलाव लाया। अब टार्गेट एशियन गेम्स ग्रुप में शामिल होकर मैं एशियन गेम्स की तैयारी और व्यवस्थित तरीके से कर सकूंगा।”
पेरिस ओलंपिक में 100 मीटर बैकस्ट्रोक हीट में बाहर होने के बाद उन्हें टॉप्स कोर ग्रुप से बाहर कर दिया गया था। अब उनका मानना है कि वे और साजन प्रकाश ही ऐसे भारतीय तैराक हैं जो एशियन गेम्स में पदक जीतने की क्षमता रखते हैं।
केआइयूजी का महत्व
नटराज ने कहा कि केआइयूजी जैसे टूर्नामेंट भारतीय वरिष्ठ तैराकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा, “भारत में सीनियर लेवल के तैराकों को बहुत कम घरेलू प्रतियोगिताएं मिलती हैं—एक सीनियर नेशनल और एक यूनिवर्सिटी नेशनल। ऐसे में केआइयूजी जैसे टूर्नामेंट उन्हें अतिरिक्त प्लेटफॉर्म देते हैं, जहाँ वे खुद को परख सकते हैं।” उन्होंने अंत में कहा कि केआइयूजी में हिस्सा लेना उनके लिए हमेशा खास रहा है और यह भारतीय तैराकी को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है।
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(Udaipur Kiran) दुबे