
नई दिल्ली, 29 अगस्त (Udaipur Kiran) । उच्चतम न्यायालय ने बांग्ला भाषी मुस्लिमों की राष्ट्रीयता की पहचान के लिए राज्यों की ओर से चलाए जा रहे अभियान के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि केवल भाषा या क्षेत्र के आधार पर निर्वासन को उचित नहीं ठहराया जा सकता है। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने साफ कहा कि किसी को भी विदेशी तय करने से पहले एक निष्पक्ष और जरुरी प्रक्रिया होनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि प्रवासी मजदूरों खासकर बंगाली भाषी मुसलमानों को ओडिशा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में मनमाने ढंगे से हिरासत में लिया जा रहा है। प्रशांत भूषण ने कहा कि कुछ मामलों में तो बिना किसी उचित प्रक्रिया के बांग्लादेश भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसी की नागरिकता के निर्धारण किए बिना ही देश से निकालना संवैधानिक सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय कानून दोनों का उल्लंघन है। प्रशांत भूषण ने कोर्ट के समक्ष कुछ मामलों का जिक्र किया जिसमें वैध दस्तावेज रखनेवाले भारतीय नागरिकों को भी सीमा पार भेज दिया गया। उनमें से एक महिला को बाद में बांग्लादेशी अधिकारियों ने भारतीय नागरिक होने के आधार पर गिरफ्तार भी कर लिया।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अवैध निर्वासन पर विचार किया जाना चाहिए लेकिन सवाल है कि यहां प्रभावित व्यक्तियों की बजाय संस्थाएं याचिकाएं दाखिल क्यों कर रही हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि प्रभावित व्यक्ति उच्चतम न्यायालय कैसे आ पाएगा। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उच्चतम न्यायालय में मामला लंबित होने का आधार बनाकर कलकत्ता उच्च न्यायालयलंबित बंदी प्रत्यक्षीकऱण याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित नहीं कर सकता। उच्चतम न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालयसे कहा कि वो प्रभावित लोगों की नागरिकता की स्थिति का सत्यापन समेत ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा करें।
उच्चतम न्यायालय ने 14 अगस्त को बांग्ला भाषी मुस्लिमों की राष्ट्रीयता की पहचान के लिए राज्यों की ओर से चलाए जा रहे अभियान पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने संबंधित नौ राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। कोर्ट ने कहा था कि अगर कोई अवैध घुसपैठिया गैरकानूनी तरीके से देश में घुस आता है तो क्या किया जाए। अगर उनको हिरासत में नहीं लिया गया तो ये तय मानिए कि वो गायब हो जाएंगे। हालांकि कोर्ट ने कहा था कि कुछ ऐसा मेकानिज्म अपनाने की जरुरत है ताकि वास्तविक नागरिक परेशान नहीं हों।
याचिका पश्चिम बंगाल प्रवासी कल्याण बोर्ड ने दायर काा है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि बांग्लाभाषी लोगों को इस आधार पर प्रताड़ित किया जा रहा है कि उनके दस्तावेज बांग्ला भाषा में हैं । ये कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक सर्कुलर के बाद राज्य सरकारें कर रही हैं। याचिका में कहा गया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के सर्कुलर को आधार बनाकर ओडिशा, राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में बांग्लाभाषी प्रवासियों को परेशान किया जा रहा है। याचिका में कहा गया है कि बांग्लाभाषी प्रवासियों को हिरासत में लिया जा रहा है और कुछ प्रवासियों को प्रताड़ित भी किया जा रहा है।
(Udaipur Kiran) /संजय
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(Udaipur Kiran) / अमरेश द्विवेदी
