जम्मू,, 29 अगस्त (Udaipur Kiran) । 26 अगस्त को माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर बादल फटने से हुए भूस्खलन की घटना में श्रद्धालुओं की मौत को लेकर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह आरोप लगाया गया कि मौसम चेतावनी के बावजूद यात्रा जारी रखी गई। इस पर श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए सभी आरोपों को झूठा और निराधार बताया है।
श्राइन बोर्ड ने कहा कि 26 अगस्त की सुबह 10 बजे तक मौसम साफ था और यात्रा सामान्य रूप से चल रही थी। यहां तक कि हेलिकॉप्टर सेवाएं भी सुचारू रूप से संचालित हो रही थीं। बोर्ड ने अपने मानक संचालन प्रक्रिया के तहत पूरे मार्ग पर कर्मचारी और डिज़ास्टर मैनेजमेंट टास्क फोर्स तैनात की थी।
जैसे ही बारिश का पूर्वानुमान मिला, तुरंत पंजीकरण रोक दिया गया और दोपहर 12 बजे तक पुराने मार्ग पर भी यात्रा निलंबित कर दी गई। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि नया मार्ग (तारकोट से होकर) 24 अगस्त से ही बंद कर दिया गया था क्योंकि वह भूस्खलन-प्रवण क्षेत्र है। जबकि पुराना मार्ग सुरक्षित माना जाता है और दशकों से वहाँ कोई ऐसी घटना नहीं हुई थी।
दुर्घटना इंदरप्रस्थ भोज़नालय के पास हुई, जहाँ कभी भूस्खलन दर्ज नहीं किया गया था। लेकिन दोपहर 2रू40 बजे अचानक भीषण बादल फटने से मात्र 50 मीटर क्षेत्र में भारी भूस्खलन हुआ। यह पूरी तरह अप्रत्याशित और अनियंत्रित प्राकृतिक आपदा थी।
बोर्ड की डिज़ास्टर मैनेजमेंट टीम ने प्रशासन, पुलिस, सीआरपीएफ, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्वयंसेवकों के साथ मिलकर तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया। 18 घायलों को तुरंत प्राथमिक उपचार देने के बाद ककरयाल स्थित सुपरसपेशलिटी अस्पताल भेजा गया। फंसे हुए श्रद्धालुओं को शाम तक तारकोट मार्ग से सुरक्षित कटरा पहुंचाया गया।
श्राइन बोर्ड ने कहा कि वह हमेशा श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देता है और हर संभव सावधानी बरती गई थी। यह प्राकृतिक आपदा पूरी तरह अप्रत्याशित थी और किसी के नियंत्रण में नहीं थी। बोर्ड ने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।
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(Udaipur Kiran) / अश्वनी गुप्ता
