
—सांस्कृतिक विरासत की मूल में है संस्कृत:नीलकंठ तिवारी
वाराणसी,28 अगस्त (Udaipur Kiran) । उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी में चल रहे संस्कृत के बटुकों व विद्वानों की जुटान हुई। गणपति दरबार में शुरूआत संस्कृत परीक्षा से हुई। जिसमें कुल 38 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। शास्त्रार्थ परम्परा के साथ विविध प्रतियोगिताओं के बाद गोष्ठी आयोजित हुई।
इसमें बतौर मुख्य अतिथि शहर दक्षिणी के विधायक डॉ.नीलकंठ तिवारी ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत की मूल में है संस्कृत । देवभाषा के सम्मान से ही हम सबका गौरव है। आज भी विदेशी हमारी ही संस्कृति की नकल करते हैं। हमारे राष्ट्र में संस्कृत भाषा ने सदैव ही उच्चतम शिखर पर रही है। आवश्यकता है की नयी पीढ़ी में इसको आगे बढ़ाने की ललक होनी चाहिए।
गोष्ठी की अध्यक्षता पूर्व कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने किया। सभा में डा.गणेश दत्त शास्त्री,डा.दिव्य स्वरूप ब्रह्मचारी,डा.रमाकांत पाण्डेय,डा.हरि प्रसाद अधिकारी,डा.महेंद्र पाण्डेय,डा.कमलाकांत त्रिपाठी,डा. रमेश चंद्र पाण्डेय,डा.विजय पाण्डेय आदि ने भागीदारी की। इसी क्रम में रामघाट स्थित सांगवेद विद्यालय में चल रहे गणपति उत्सव में ऋग्वेद प्रतियोगिता हुई। न्याय शास्त्र के शास्त्रार्थ में राजराजेश्वर द्राविड़,अभिषेक त्रिपाठी एवं सात्विक उत्तीर्ण हुए। यह जानकारी उत्सव समिति के अध्यक्ष गणेश्वर शास्त्री ने दी।
—————
(Udaipur Kiran) / श्रीधर त्रिपाठी
