
—पूर्व मुख्यमंत्री पंडित कमलापति त्रिपाठी की 120 वीं जयंती हर्षोल्लास से मनायी गयी
वाराणसी,28 अगस्त (Udaipur Kiran) । उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पं.कमलापति त्रिपाठी की 120 जयंती ऋषि पंचमी पर गुरूवार को पूरे उत्साह के साथ मनाई गई। सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के योग साधना केन्द्र में आयोजित जयंती समारोह में वक्ताओं ने पंडित जी के विशाल व्यक्तित्व और कृतित्व को नमन किया।
समारोह में बतौर मुख्य अतिथि श्री लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रो.मुरली मनोहर पाठक ने कहा कि पंडित कमलापति त्रिपाठी का राजनीति उनके जीवन का सम्पूर्ण व्यक्तित्व का परिचय नहीं हो सकता। राजनीति प्रासंगिक हैं यदि वे राजनेता के साथ कुशल पत्रकार थे। उनका जीवन दर्शन भारतीय संस्कृति एवं संस्कार को परिभाषित करता है, वे इस संस्था के संस्थापकों में से एक थे यहां की संस्कृति एवं संस्कार से हम वैश्विक पटल पर स्थापित हैं,ऐसे में इस संस्था का कार्य और महत्वपूर्ण हो जाता है। समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि बहुआयामी व्यक्तित्व और कृतित्व के धनी पं.कमलापति त्रिपाठी से जुड़ी स्मृतियों का सिलसिला अनन्त है। सन् 1905 में इसी बनारस की पवित्र धरती पर ऋषि पंचमी के दिन जन्मे पंडित जी की जयन्ती संवत और ईस्वी सन् दोनों की तिथियों पर मनाने की प्रशस्त परम्परा रही है। जो व्यक्ति ऋषि पंचमी के दिन पैदा होता है वह ऋषि ही होता है। उनकी 120 वीं जयन्ती पर उनकी सतत प्रेरक स्मृतियों को मैं प्रणाम करता हूं। पं. कमलापति त्रिपाठी काशी के नहीं देश के भी गौरव थे।
हिन्दी को राष्ट्र भाषा के रूप में स्थापित- संविधान सभा में उन्होंने अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हुए अपनी मां यानी हिंदी का साथ दिया। हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित कराने के साथ ही उन्होंने भारतीय गणतंत्र के नामकरण जैसे मामलों में उल्लेखनीय संसदीय भूमिका निभाई थी।
प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि उनके योगदान सदैव उनके संस्कृत शास्त्रों के ज्ञान पक्ष को ही दर्शाता है। सच कहने का साहस केवल पंडित जी में था। जिसके बल पर उन्होंने अनेकों सामाजिक विकास के कार्य किए । अन्य वक्ताओं में प्रो. सतीश कुमार राय, डॉ विजय शंकर पांडेय आदि ने भी पंडित जी से जुड़े संस्मरण सुनाए। समारोह में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने पौधारोपण के बाद पंडित कमलापति त्रिपाठी के प्रतिमा पर चंदन का टीका कर माल्यार्पण भी किया। समारोह में एक ग्रंथ के साथ परिचय-अभिनव प्रकाशनों का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के चार आचार्यों का अभिनंदन-कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने किया। इनमें प्रो. विधु द्विवेदी,प्रो. महेन्द्र पांडेय, डॉ रविशंकर पांडेय एवं डॉ कुंजबिहारी द्विवेदी शामिल रहे।
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(Udaipur Kiran) / श्रीधर त्रिपाठी
