

छात्रों को दिया पढ़ते रहिए, देश को आगे बढ़ाइए का मंत्र
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का 30 वां दीक्षांत समारोह
झांसी, 27 अगस्त (Udaipur Kiran) । बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के 30 वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने छात्रों को सीखने की दृष्टि और अनुशासन का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि छात्रों को यह सीखने की आवश्यकता है कि भाषण या मार्गदर्शन से क्या ग्रहण करना है और उसे जीवन में कैसे उतारना है।
राज्यपाल ने कहा कि छात्रों को पढ़ाई और तैयारी देश के विज़न को ध्यान में रखकर करनी चाहिए। उन्होंने पुस्तकालय और शोध कार्य को शिक्षा का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि यही प्रयास भारत को विश्व पटल पर शीर्ष स्थान दिला सकते हैं।
दीक्षांत समारोह में उन्होंने सबसे अधिक चिंता छात्रों की उपस्थिति को लेकर जताई। उन्होंने कहा कि छात्रों की कम से कम 75% उपस्थिति अनिवार्य होनी चाहिए, अन्यथा उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। कहा कि अक्सर देखा जाता है कि छात्र पहले सेमेस्टर में तो नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहते हैं किंतु बाद के वर्षों में उनकी संख्या घटती जाती है। लगातार परीक्षाओं के दबाव के कारण छात्रों के पास पढ़ाई और शोध के लिए पर्याप्त समय भी नहीं बचता।
शिक्षकों की जिम्मेदारी और निगरानी
राज्यपाल ने कक्षाओं में शिक्षकों की उपस्थिति और समय पालन पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अक्सर अध्यापक 45 मिनट पढ़ाने के बाद 15 मिनट का आराम कर लेते हैं या देर से आते हैं। आवश्यकता पड़ने पर शिक्षकों की कक्षाओं में भी सीसीटीवी कैमरे लगाए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति आवश्यकता के अनुसार होनी चाहिए। कितने अध्यापक चाहिए इसका पता होना चाहिए, लेकिन अभी कई नियुक्तियां आवश्यकता से अधिक की जाती हैं, उन्होंने स्पष्ट किया।
उद्देश्य परक हो शोध
आनंदीबेन पटेल ने अयोध्या का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ पर्यटन के साथ प्रदूषण भी बढ़ा, इस पर शोध कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को दी गई। लेकिन यह रिपोर्ट नगर निगम तक समय पर नहीं पहुँची। परिणामस्वरूप समस्या का समाधान नहीं हुआ और शोध का उद्देश्य अधूरा रह गया। राज्यपाल ने रिसर्च प्रोजेक्ट्स में फंडिंग एजेंसियों की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लखनऊ में साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के अंतर्गत कई प्रोजेक्ट विश्वविद्यालयों द्वारा भेजे गए। लेकिन, प्रोजेक्ट चयन समिति ने बिना कारण बताए कई प्रस्ताव लौटा दिए। जब उनसे कारण पूछा गया तो कोई उत्तर नहीं मिला। उन्होंने इस प्रक्रिया में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि फंडिंग एजेंसियों को भी इस प्रकार की अनियमितताओं की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने बल देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों में होने वाला हर शोध जनता के कल्याण और समस्याओं के समाधान के लिए होना चाहिए, तभी उसका वास्तविक महत्व सिद्ध होगा।
छात्रों को रियल हीरो से जोड़ने की जरूरत
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में छात्रों को केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं बल्कि अनुभव और प्रेरणा देने वाले रियल हीरो से भी जोड़ा जाना चाहिए। राज्यपाल ने बताया कि हाल ही में अंतरिक्ष यात्रा कर लौटे शुभांशु शुक्ला ने राजभवन में मुलाकात की। उन्होंने कहा कि उन्हें ए.के.टी.यू. के छात्रों को अपनी यात्रा, ट्रेनिंग और इसमें प्रयुक्त तकनीक के बारे में बताना चाहिए ताकि विद्यार्थी स्पेस टेक्नोलॉजी और भारत की प्रगति से परिचित हो सकें।
रक्षा और स्पेस सेक्टर में अवसर
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पाँच स्थानों पर डिफेंस केंद्र स्थापित हो रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। साथ ही उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय में इसरो परियोजनाओं पर दी गई जानकारी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज स्पेस टेक्नोलॉजी में वैश्विक पहचान बना रहा है। राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह की मुख्य अतिथि डॉ चंद्रिका कौशिक से आग्रह किया कि वह अपनी टीम के साथ राजभवन आकर विश्वविद्यालयों के लिए सिलेबस सामग्री और फंडिंग एजेंसियों की नीतियों के निर्धारण में सहयोग करें।
डिजिलॉकर का उपयोग अनिवार्य हो
राज्यपाल ने चिंता जताई कि विगत दो वर्षों से विश्वविद्यालय छात्रों की डिग्री और मार्कशीट डिजिलॉकर पर अपलोड कर रहे हैं, परंतु अब भी हार्ड कॉपी दी जा रही है। उन्होंने कहा, जब तकनीक उपलब्ध है तो छात्रों को तैयार करना होगा कि वे केवल डिजिलॉकर से ही अपने दस्तावेज प्राप्त करें।
भारतीय संस्कृति का उदाहरण
राज्यपाल ने भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर का उल्लेख करते हुए कहा कि गणेश चतुर्थी के प्रसंग में गणेश जी का सिर जोड़ा जाना विश्व की पहली माइक्रो सर्जरी के रूप में देखा जा सकता है। इसी तरह महाभारत में अभिमन्यु को मां के गर्भ में शिक्षा मिलने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गर्भ संस्कार का प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर गहराई से पड़ता है। इस विषय पर छात्रों के लिए वर्कशॉप आयोजित किए जाने की आवश्यकता बताई गई।
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(Udaipur Kiran) / महेश पटैरिया
