
मीरजापुर, 26 अगस्त (Udaipur Kiran) । “वृद्ध गाय का गोबर और गोमूत्र खेती के लिए किसी वरदान से कम नहीं” यह संदेश उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने मंगलवार को अष्टभुजा पर पत्रकारों से वार्ता के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप प्रत्येक किसान परिवार के दरवाजे पर कम से कम दो गाय होनी चाहिए। इससे जहां प्राकृतिक खेती को बल मिलेगा, वहीं निराश्रित गोवंश की समस्या भी दूर होगी।
अध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश की 7,717 गौशालाओं में लगभग 12.58 लाख गोवंश संरक्षित हैं। इन गौशालाओं को अब प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां प्राकृतिक खेती, बायोगैस ऊर्जा और पंचगव्य उत्पादों के निर्माण की दिशा में स्वयं सहायता समूहों और युवाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि चारागाह भूमि को कब्जे से मुक्त कराकर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। गौशालाओं में नीम, पीपल, बरगद और सहजन जैसे छायादार वृक्षों का व्यापक वृक्षारोपण कराया जाएगा। सीमावर्ती जनपदों में गो-तस्करी रोकने के लिए एडीजी स्तर और जनपद स्तर पर एएसपी स्तर के अधिकारियों को नोडल अधिकारी नामित करने की भी घोषणा की।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए नेशनल मिशन फॉर नेचुरल फार्मिंग (एनएमएनएफ) के तहत क्लस्टरों का गठन किया जा रहा है। इससे किसानों को रसायन मुक्त व स्वास्थ्यवर्धक भोजन उत्पादन में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना के अंतर्गत एक किसान अधिकतम चार गोवंश को गोद ले सकता है। प्रति गोवंश 50 रुपये प्रतिदिन यानी 6 हजार रुपये मासिक सहायता दी जाएगी।
अध्यक्ष ने कहा कि गो सेवा केवल दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक जागरण का आंदोलन है। यह अभियान हर गांव, हर किसान और हर युवा-महिला स्वयं सहायता समूह की साझेदारी से आगे बढ़ेगा।
इस अवसर पर आयोग के उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ला, सदस्य रमाकांत उपाध्याय, दीपक गोयल, राजेश सेंगर सहित पशुपालन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
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(Udaipur Kiran) / गिरजा शंकर मिश्रा
