श्रीनगर, 26 अगस्त, (हि .स)। जम्मू-कश्मीर विधानसभा की सार्वजनिक उपक्रमों की समिति ने आज उद्योग एवं वाणिज्य (जेकेएसआईडीसीओ) विभाग से संबंधित लेखापरीक्षा अनुच्छेदों की समीक्षा के लिए श्रीनगर स्थित विधानसभा परिसर में एक बैठक बुलाई।
बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष अली मोहम्मद सागर ने की और इसमें सदस्य सैफुल्लाह मीर, अली मोहम्मद डार, बलदेव राज शर्मा, मीर मोहम्मद फैयाज, रणबीर सिंह पठानिया, बशीर अहमद वीरी, शौकत हुसैन गनई, सैफुद्दीन भट और तनवीर सादिक ने भाग लिया।
बैठक में वरिष्ठ उप महालेखाकार, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त सचिव, हस्तशिल्प एवं हथकरघा निदेशक, वित्त निदेशक, सिकॉप के प्रबंध निदेशक, वित्त व्यय महानिदेशक, सिकॉप के महाप्रबंधक, जेकेसीएल के प्रबंध निदेशक, सिडको/सिकॉप के मुख्य लेखा अधिकारी, परिवहन विभाग के विशेष सचिव और संबंधित विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
समिति ने जेकेएसआईडीसीओ से संबंधित लेखापरीक्षा पैरा 5.3 और 5.4 (2017-18) तथा 10.3 और 10.4 (2020-21) पर व्यापक चर्चा की। सदस्यों ने सांबा में सीमेंट ग्राइंडिंग-कम-पैकिंग इकाई के कम क्षमता उपयोग, पंपोर में विफल अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केंद्र (आईटीसी) परियोजना पर धन का अवरोध और अनुत्पादक व्यय, लघु-स्तरीय औद्योगिक इकाइयों को ब्याज मुक्त अग्रिम प्रदान करना और जीएसटी बकाया की वसूली सहित कई मुद्दों की जांच की।
आरंभ में अध्यक्ष ने राजस्व सृजन और रोज़गार के अवसरों के लिए जम्मू-कश्मीर की औद्योगिक क्षमता का दोहन करने की आवश्यकता पर बल दिया और पूरे केंद्र शासित प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों को मज़बूत करने के लिए स्थायी उपाय करने का आह्वान किया।
समिति ने संबंधित विभागों को जम्मू-कश्मीर में परिचालन और बंद पड़ी इकाइयों की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। समिति ने स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आईटीसी जैसी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर भी ज़ोर दिया।
इसके अलावा अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि परियोजनाओं के कार्यान्वयन में देरी और लापरवाही के लिए अधिकारियों की ज़िम्मेदारी तय की जाए।
समिति ने सभी चल रही परियोजनाओं की स्थिति की भी समीक्षा की और विभागों को 15 दिनों के भीतर एक व्यापक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व पर ज़ोर देते हुए अध्यक्ष ने सभी सार्वजनिक उपक्रमों की कठोर ऑडिट, अद्यतन स्थिति रिपोर्ट और सूचित निर्णय लेने और आवश्यक सुधारों को सुगम बनाने के लिए प्रासंगिक ऑडिट दस्तावेज़ प्रस्तुत करने का आह्वान किया।
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(Udaipur Kiran) / SONIA LALOTRA
