
जयपुर, 26 अगस्त (Udaipur Kiran) । राजस्थान हाईकोर्ट ने एसआई और प्लाटून कमांडर भर्ती-2009 में याचिकाकर्ता पूर्व सैनिक को बिना शारीरिक दक्षता परीक्षा लिए तीन माह में नियुक्ति के आदेश दिए हैं। अदालत ने याचिकाकर्ता को वरिष्ठता सहित समस्त परिलाभ भी देने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि उसे इस अवधि का वेतन नहीं मिलेगा। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश दीपक सोगरवाल की याचिका को निस्तारित करते हुए दिए।
अदालत ने माना कि पूर्व सैनिक पहले ही सेना में कठोर शारीरिक प्रशिक्षण और सेवा कर चुके होते हैं। इसलिए उन्हें नवयुवक अभ्यर्थियों के समान नहीं आंका जाना चाहिए। ऐसे में उन पर राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियम, 1989 को लागू करना, विशेष रूप से उनके पुनर्वास हेतु बनाए गए 1988 के नियमों की मंशा को विफल कर देगा।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सार्थक रस्तोगी ने बताया कि पुलिस एसआई भर्ती 2009 की प्रक्रिया में 5 किलोमीटर दौड़ और लंबी कूद सहित अन्य कठिन शारीरिक परीक्षण पूर्व सैनिकों पर थोपे गए थे। जबकि यह राजस्थान सिविल सेवा पूर्व सैनिकों के समायोजन, नियम, 1988 के विपरीत है। इन नियमों के तहत पूर्व सैनिकों के लिए केवल साधारण शारीरिक फिटनेस की जरूरत ही रखी गई है। इसलिए प्रार्थी को बिना कठोर शारीरिक दक्षता टेस्ट के ही एसआई के पद पर नियुक्ति दी जाए। इसके विरोध में राज्य सरकार ने कहा कि पुलिस सेवा को देखते हुए यह शारीरिक दक्षता परीक्षा लेना अनिवार्य है। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनकर कहा कि याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी 1988 के नियमों के तहत दुबारा परखें। यदि वे लिखित परीक्षा और साक्षात्कार में सफल हुए तो उन्हें नियुक्ति दी जाए।
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(Udaipur Kiran)
