
विधायक मुकेश शर्मा ने विधानसभा में उठाया मुद्दा
गुरुग्राम, 26 अगस्त (Udaipur Kiran) । फाइव स्टार प्राइवेट अस्पतालों के शहर गुरुग्राम में अब नागरिक अस्पताल बनने की भी उम्मीद जगी है। विधानसभा के सत्र में स्वास्थ्य मंत्री आरती राव द्वारा मंगलवार काे एक प्रश्न के उत्तर में यहां के अस्पताल के लिए बजट स्वीकृत होने की जानकारी दी गई है।गुरुग्राम के विधायक मुकेश शर्मा ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया।इस सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने कहा कि इस परियोजना के क्रियान्वयन का कार्य तेजी से चल रहा है। आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है, ताकि गुरुग्राम में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों। बता दें कि 58 साल पहले वर्ष 1967 में बनाए गए जिला के नागरिक अस्पताल की इमारत काफी कंडम हो गई थी। इसके रेनोवेशन पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। इमारत की छतों से सदा पानी ही टपकता रहा। विशेषकर ओपीडी एरिया में तो डॉक्टर्स के कमरों के बाहर टपकते पानी को लेकर सदा बाल्टियां ही रखी रहती थी। वर्ष 2017 में पीडब्ल्यूडी विभाग ने अपनी रिपोर्ट में सिविल लाइन क्षेत्र के नागरिक अस्पताल की इमारत को कंडम घोषित किया था।मुख्य नागरिक अस्पताल नया बनाने के लिए एक साल बाद 2018 में अस्पताल को शिफ्ट करने की तैयारी हुई। कुछ विभाग उसी साल शिफ्ट किए गए और बाकी अस्पताल (एमआरआई, सीटी स्कैन विभाग को छोडक़र) 2019 में शिफ्ट हो गया। इसे सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल और सेक्टर-31 पॉलीक्लीनिक में शिफ्ट किया गया। इसके बाद पुरानी बिल्डिंग को तोड़ऩे के लिए टेंडर आदि देने के लिए कार्यवाही होती रही। अस्पताल के विस्तार के लिए साथ लगते राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक (बाल) की जमीन को स्वास्थ्य विभाग के नाम ट्रांसफर की कार्यवाही हुई। विभाग ने स्कूल की आधी से अधिक जमीन को अपने कब्जे में लिया।
जून-2021 से अस्पताल की बिल्डिंग को तोडऩे का काम शुरू किया गया था। वर्ष 2022 के मध्य तक आधी बिल्डिंग तो तोड़ दी गई, लेकिन आधी का काम अधूरा रह गया था। ऐसा इसलिए कि वहां पर एमआरआई और सीटी स्कैन सेंटर चल रहे थे। कई बार केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने अस्पताल परिसर का दौरा किया। काम तेजी से करने के आदेश भी दिए, लेकिन काम में तेजी कभी नजर नहीं आई। पहले इस अस्पताल को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 500 बेड का बनाने की घोषणा की थी, जो कि अब 100 बेड घटाकर 400 बेड कर दिए। इसके बाद इस अस्पताल को बनाने के लिए तो कुछ नहीं हो पाया। यहां बेड की संख्या घटती-बढ़ती रही। कभी 400, कभी 500 तो कभी 700 बेड का अस्पताल बनाने की बातें होती रहीं।
(Udaipur Kiran)
