
धमतरी, 26 अगस्त (Udaipur Kiran) । छत्तीसगढ़ में महिलाओं का प्रमुख पर्व हरितालिका तीज पारंपरिक आस्था और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। तीज पर्व को लेकर मंगलवार 26 अगस्त को धमतरी शहर सहित ग्रामीण अंचलों में खासा उत्साह देखने को मिला। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए यह व्रत करती हैं। वहीं अविवाहित युवतियां भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए पूरे श्रद्धाभाव से व्रत रखती हैं। शहर के शिवालयों में महिलाएं समूह में पूजन करती हुई दिखाई दी। पर्व के चलते घर में पारंपरिक ठेठरी, खुरमी, अइरसा, सोहारी सहित अन्य व्यंजन तैयार किए गए।
परंपरा के अनुसार तीज पर्व के एक दिन पूर्व महिलाएं करेला और चावल का भोजन करती हैं, जिसे करूभात कहा जाता है। इसके बाद अगले दिन निर्जला व्रत धारण किया जाता है। व्रत के दिन महिलाएं सुबह से बिना जल और अन्न ग्रहण किए शाम तक व्रत करती हैं। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। महिलाएं फूल, अक्षत, नारियल, धूप-बत्ती और अन्य पूजन सामग्री से विधिपूर्वक पूजा करती हैं। पूजा के बाद महिलाएं शिव-पार्वती से पति की लंबी उम्र, परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना करती हैं। तीज के दिन महिलाएं प्रायः नई साड़ी पहनकर सजधज कर पूजा-अर्चना करती हैं। पूरे वातावरण में भक्ति और उत्साह का माहौल रहता है। इस व्रत को करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति और वैवाहिक संबंधों में मजबूती आती है, ऐसा मान्यता है।
धमतरी शहर के अलावा जिले के विभिन्न गांवों में भी इस पर्व की रौनक देखने को मिली। जगह-जगह मंदिरों में पूजा-अर्चना और व्रत करने वाली महिलाओं की भीड़ रही। कई स्थानों पर समाजसेवियों और सामाजिक संगठनों ने सोमवार देर शाम को सामूहिक करूभात का आयोजन भी किया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। तीज पर्व के अगले दिन पारणा किया जाता है। महिलाएं पुनः भगवान शिव-पार्वती की पूजा करके व्रत का समापन करती हैं और भोजन ग्रहण करती हैं। पारणा के समय महिलाएं घर में बने पारंपरिक पकवान और फलाहार से व्रत तोड़ती हैं। पर्व के अवसर पर महिलाओं ने लोकगीत गाए और एक-दूसरे को तीज की शुभकामनाएं दीं। तीज पर्व ने एक ओर जहां धार्मिक आस्था को प्रकट किया, वहीं दूसरी ओर सामाजिक समरसता और पारिवारिक एकता का संदेश भी दिया।
(Udaipur Kiran) / रोशन सिन्हा
