
धमतरी, 26 अगस्त (Udaipur Kiran) । गणेश चतुर्थी पर्व को लेकर पूरे जिले में उत्साह का माहौल है। जगह-जगह भगवान श्री गणेश की प्रतिमाएं विराजित होंगी और मंदिरों में विशेष आयोजन होंगे। इसी कड़ी में मठमंदिर चौक स्थित प्राचीन श्री सिद्धिविनायक गणेश मंदिर में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 24 घंटे का अखण्ड जलाभिषेक और अखण्ड श्रीगणपति अथर्व शीर्ष पाठ आयोजित किया जा रहा है। यह परंपरा लगातार 34 वर्षों से निभाई जा रही है।
आज मंगलवार सुबह छह बजे से प्रारंभ हुआ अखण्ड जलाभिषेक कल 27 अगस्त की सुबह छह बजे तक अनवरत जारी रहेगा। इस दौरान मंदिर प्रांगण में विद्वान आचार्यों और पंडितों – पं. होमनप्रसाद शास्त्री, पं. कामेश्वर पाण्डेय, पं. श्रीकांत तिवारी, पं. चिरागधर दीवान, पं. नरेशधर दीवान, पं. वैभवधर दीवान और नीतिन दीवान द्वारा अखण्ड अथर्वशीर्ष पाठ किया जा रहा है। मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।
मठमंदिर चौक स्थित यह सिद्धिविनायक गणेश मंदिर अति प्राचीन माना जाता है। बताया जाता है कि मंदिर ट्रस्ट का गठन वर्ष 1932 में हुआ था। उस समय यहां श्री गणेश की एक छोटी प्रतिमा विराजमान थी, जिसके बाद धीरे-धीरे मंदिर का विस्तार और विकास होता गया। हालांकि मंदिर की स्थापना का सटीक उल्लेख उपलब्ध नहीं है, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था इस मंदिर से गहराई से जुड़ी हुई है। गणेश चतुर्थी पर्व के अवसर पर 27 अगस्त सुबह आठ बजे से श्री सिद्धिविनायक का श्रृंगार किया जाएगा। इसके बाद 10 बजे हवन-पूजन, 12 बजे महाआरती और प्रसाद वितरण होगा। गणेशोत्सव के दौरान प्रतिदिन संध्याकाल में महाआरती का आयोजन किया जाएगा।
पूजन से मिलता है विशेष पुण्य लाभ:
पंडित श्रीकांत तिवारी ने जानकारी दी कि गणेश चतुर्थी पर भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना से विशेष पुण्य लाभ मिलता है। मंदिर का जीर्णोद्धार वर्ष 1992 में किया गया था, जिसके पश्चात 1993 से प्रतिवर्ष गणेश चतुर्थी पर अखण्ड जलाभिषेक की परंपरा शुरू हुई। यह क्रम लगातार 34 वर्षों से जारी है। विशेष बात यह है कि मंदिर में होने वाला जलाभिषेक का जल लगभग 100 फीट भूमि में समाहित होता है, जिससे जल संरक्षण और संवर्धन का भी संदेश समाज को दिया जा रहा है। पंडितों ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार गणेश जी का जलाभिषेक ताम्रपात्र से 108 या सहस्त्र छिद्रों से किया जाता है, जिससे सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
(Udaipur Kiran) / रोशन सिन्हा
