
नई दिल्ली, 23 अगस्त (Udaipur Kiran) । चुनाव के मद्देनजर इन दिनों कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव बिहार दौरे पर हैं। इस पर निशाना साधते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि राहुल गांधी सहित पूरा इंडी गठबंधन बिहार की जनता को भ्रमित करने में जुटा है।
शनिवार को भाजपा मुख्यालय में प्रवक्ता और सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने मीडिया को दिए अपने बयान में कहा कि राहुल गांधी का पटना में हनुमान मंदिर जाने का कार्यक्रम था, लेकिन वे मस्जिद चले गए। उन्होंने पूछा कि उन्होंने ऐसा तेजस्वी यादव के कहने पर किया या देश से बाहर किसी नेता के कहने पर किया। यह जनता खूब समझ रही है। कांग्रेस पार्टी भ्रष्टाचार, अपराध, और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बिहार के लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी कहा कि बिहार के आगामी चुनावी रण में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ‘चोर-चोर’ चिल्ला रहे हैं। हाल ही में कुछ तथ्य सामने आए हैं कि इनमें से कौन अपराधों का सरगना बन गया है। एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि देश में जिन मुख्यमंत्रियों पर सबसे ज्यादा मामले दर्ज हैं, उनमें तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पहले नंबर पर हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन दूसरे नंबर पर हैं।
अब साफ दिख रहा है कि भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए विपक्ष में इतनी बेचैनी क्यों है, इसलिए जेल में बंद प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री वाले विधेयक का विरोध हो रहा है।
उन्होंने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव से पूछा कि ये वही रेवंत रेड्डी हैं जिन्होंने बिहार का डीएनए को घटिया बताया था, वहीं तमिलनाडु के एक मंत्री ने बिहार के लोगों को छोटे काम करने वाला बताया था। ऐसे में राहुल गांधी क्या इन नेताओं के बयानों का समर्थन करते हैं ? इन नेताओं से इतना लगाव क्यों है?
उन्होंने कहा कि 50 साल पहले इंदिरा गांधी एक ऐसा नियम लेकर आईं थी जिसके तहत प्रधानमंत्री पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकती थी। वो जीते तो चुनाव आयोग सही है और हारे तो सब गलत। आज पचास साल के बाद फिर इंदिरा गांधी के पोते वही बाते कह रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जेल में बंद प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री विधेयक में प्रधानमंत्री को भी दायरे में रखा। वो जो कहते हैं, वह करते हैं। बिहार में जो उन्होंने जो संकल्प लिए वो निश्चित रूप से पूरे किए।
उल्लेखनीय है कि डेमोक्रेटिक रिफॉर्म एसोसिएशन (एडीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 30 मुख्यमंत्रियों में से 12 यानी 40 प्रतिशत ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अपने खिलाफ 89 मामले घोषित किए हैं, जो सबसे ज़्यादा है, इसके बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन हैं, जिने खिलाफ 47 मामले दर्ज हैं।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 19, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 13 और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पांच मामले घोषित किए हैं।
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(Udaipur Kiran) / विजयालक्ष्मी
