नई दिल्ली, 26 अगस्त (Udaipur Kiran) । केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग ने मंगलवार को उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) और पॉलिटेक्निक संस्थानों के 21 शिक्षकों का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार (एनएटी) 2025 के लिए किया है। यह पहला अवसर है जब स्कूली शिक्षकों के अलावा उच्च शिक्षा के अध्यापकों को भी इस सम्मान के दायरे में शामिल किया गया है।
इस बार चयनित ये सभी शिक्षक केंद्रीय विश्वविद्यालयों, राज्य विश्वविद्यालयों, आईआईटी, आईआईएम, आईआईएसईआर और पॉलिटेक्निक संस्थानों से हैं। इनमें कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश से 2-2, पंजाब, पुदुचेरी, केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बेंगलुरु, मिजोरम, नई दिल्ली और अरुणाचल प्रदेश से एक-एक शिक्षक शामिल हैं।
चयनित शिक्षकों में प्रमुश हैं-डॉ. श्रीदेवी, शारनबसवा यूनिवर्सिटी, कर्नाटक। डॉ. अंजना भाटिया, हंस राज महिला महाविद्यालय, पंजाब। डॉ. देबयान सरकार, आईआईटी इंदौर, मध्य प्रदेश। प्रो. संकेत गोयल, बिट्स पिलानी, हैदराबाद। प्रो. मनीष बी. एस., आईआईएसटी त्रिवेंद्रम, केरल। प्रो. विवा शर्मा, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश। प्रो. श्रीवर्धिनी केशवमूर्ति, आईआईएम बैंगलोर। डॉ. झोरामदिन्थारा, मिज़ोरम विश्वविद्यालय। प्रो. गणेश तिम्मन्ना पंडित, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली। उर्विश प्रविणकुमार सोनी, गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, अहमदाबाद।
शिक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 ने यह माना है कि प्रेरित और सक्षम शिक्षक छात्रों, संस्थानों और शिक्षा जगत की प्रगति के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। इसी दृष्टिकोण से वर्ष 2023 में निर्णय लिया गया था कि एनएटी के अंतर्गत उच्च शिक्षा संस्थानों और पॉलिटेक्निक संस्थानों के शिक्षकों को भी पुरस्कार दिए जाएंगे।
पहली श्रेणी उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों के लिए है, जिसके अंतर्गत तीन उप-श्रेणियां हैं। (i) इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी, वास्तुकला, (ii): गणित, भौतिक विज्ञान, जैविक विज्ञान, रासायनिक विज्ञान, चिकित्सा, फार्मेसी सहित शुद्ध विज्ञान और (iii): कला एवं सामाजिक विज्ञान, मानविकी, भाषाएं, विधि अध्ययन, वाणिज्य, प्रबंधन। दूसरी श्रेणी पॉलिटेक्निक संस्थानों के शिक्षकों के लिए है, जिसमें कुल 10 पुरस्कार हैं।
चयन प्रक्रिया दो चरणों में की गई पहले प्रारंभिक स्क्रीनिंग समिति द्वारा नामांकित उम्मीदवारों का मूल्यांकन, और फिर राष्ट्रीय ज्यूरी द्वारा अंतिम चयन।
चयन के प्रमुख मानदंड
शिक्षण-प्रशिक्षण प्रभावशीलता, आउटरीच गतिविधियां, अनुसंधान व नवाचार, स्पॉन्सर्ड रिसर्च, फैकल्टी डेवलपमेंट व परामर्श कार्य। इनमें सबसे अधिक वज़न सीखने की प्रभावशीलता और सामाजिक-शैक्षणिक योगदान को दिया गया।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन पुरस्कारों से उत्कृष्ट अध्यापकों को प्रोत्साहन मिलेगा और शिक्षा जगत में उत्कृष्टता की संस्कृति और मजबूत होगी।
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(Udaipur Kiran) / सुशील कुमार
