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याद रखने के लिए चीजों को विजुअलाइज करें और इनवोल्व हों : नरेंद्र मोदी

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परीक्षा पे चर्चा में प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को दिए तनाव से बचने मन्त्र
नई दिल्ली . प्रधानमंत्री मोदी साल 2018 से परीक्षा से पहले छात्रों से बातचीत कर रहे हैं. पहली बार `परीक्षा पे चर्चा` कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में हुआ था. `परीक्षा पे चर्चा` कार्यक्रम के जरिए वह हर साल छात्रों से संवाद करते हैं और उन्हें परीक्षा के तनाव को दूर करने के उपाय सुझाते हैं. कोरोना संक्रमण के चलते इस बार कार्यक्रम का आयोजन वर्चुअल हो रहा है. `परीक्षा पे चर्चा` कार्यक्रम के लिए 12 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन हुए है.
प्रधानमंत्री मोदी आज `परीक्षा पे चर्चा` कार्यक्रम के तहत छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ संवाद कर रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना के चलते इस बार आपसे (छात्रों से) वर्चुअल मोड से बातचीत करनी पड़ रही है. छात्रों से प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों को परीक्षा का डर नहीं होता. वो हर साल होती है. परीक्षा ही सब कुछ नहीं होती. असल में आसपास का माहौल स्टूडेंट्स को परेशान करता है. छात्रों के लिए दबाव का माहौल नहीं बनाना चाहिए. बच्चों को घर में तनावमुक्त माहौल में जीना चाहिए.
इस दौरान छात्रों, शिक्षकों तथा अभिभावकों ने प्रधानमंत्री मोदी से संवाद किया और अपनी समस्या, प्रश्न सामने रखे. प्रधानमंत्री मोदी ने इन सभी का जवाब दिया और छात्रों को मार्गदर्शन भी दिया.
देखें अब तक प्रधानमंत्री मोदी की परीक्षा पे चर्चा के कुछ मुख्य अंश…
-कैसे रखें चीजों को याद
विद्यार्थी कभी यह नहीं सोचें कि वह चीजों को भूल जाते हैं. याद करने की बजाय जीने की कोशिश करें. चीजों को सहजता और सरलता के साथ लें. क्षण में इनवोल्व हों. पढ़ाई के दौरान वहीं मन होना भी चाहिए, खेल के मैदान में नहीं. विजुअलाइज करें.
जब घर से निकलें तो याद रखें कि बैग में तीसरे या पांचवें नंबर पर कौन सी किताबें रखीं हैं. जो किताब जब चाहिए, उस वक्त वही निकालें. इससे चीजों को याद रखने का आपका आत्मविश्वास बढ़ जाएगा.
पर्ताधानमंत्री ने कहा कि आपको सोचना चाहिए कि आप अपने किस सपने को अपना संकल्प बनाना चाहेंगे. सपना सिर्फ लें नहीं, बल्कि उसे सच करने का संकल्प लें. करियर में शॉर्टकट मारना कई बार अंधकार की शुरुआत होता है.
पीएम मोदी ने अभिभावकों से कहा- बच्चे बड़े स्मार्ट होते हैं. जो आप कहेंगे, उसे वो करेंगे या नहीं करेंगे, यह कहना मुश्किल है, लेकिन इस बात की पूरी संभावना होती है कि जो आप कर रहे हैं, वो उसे बहुत बारीक़ी से देखता है और दोहराने के लिए लालायीत हो जाता है. जब आप इन मूल्यों को पुराण, हमारे इतिहास, पुरखों की बातों से जोड़ें. तब बच्चे इनसे प्रेरित होंगे, उनके आचार व्यवहार में मूल्यों को उतारना आसान हो जाएगा. बच्चों पर अपने मूल्य थोपने का प्रयास न करें. बल्कि मूल्यों को खुद जीकर बच्चों को प्रेरित करने का प्रयास करें.
पीएम मोदी ने कहा – मैं छात्रों से कहना चाहता हूं कि आप सभी विषयों को बराबर समय दीजिए. पढ़ाई के दौरान सबसे पहले कठिन सवाल हल करे क्योंकि इस दौरान आपका दिमाग ताजा रहता है. अगर आप पहले कठिन सवाल हल कर लेते हैं, तो बाद में सरल सवाल तो और भी आसान हो जाएंगे.
जब मैं प्रधानमंत्री बना तो मुझे भी शुरू में कई मुश्किल चीजों का सामना करना पड़ता था. मैं अपनी सुबह कठिन चीजों से करना पसंद करता हूं. मुश्किल से मुश्किल चीजें अफसर मेरे सामने लेकर आते हैं, मैं उन्हें फौरन समझ लेता हूं, निर्णय करने की दिशा में आगे बढ़ता हूं.
-खाली समय, इसको खाली मत समझिए, ये खजाना है. खाली समय एक सौभाग्य है, आपकी दिनचर्या में खाली समय के पल होने ही चाहिए, वरना जिंदगी रोबोट जैसी हो जाती है.
– उन कामों की लिस्ट बनाएं जो कभी आपको मुश्किल लगा करती थीं, लेकिन अब आप उन्हें बेहद आसानी से कर लेते हैं. जब आप उस लिस्ट को पढ़ेंगे तो आपको वो चीजें मुश्किल लगेंगी ही नहीं.
– किसी विषय का मुश्किल लगना आपकी असफलता नहीं है. आप उसे विषय से भागें नहीं. उसे समय दें. शिक्षक विद्यार्थियों को टोकें रोकें नहीं. प्रोत्साहित करें. आपलोगों को किसी खास सब्जेक्ट या चैप्टर से डर का सामना करना पड़ता है, लेकिन आप दुनिया में अकले नहीं हैं, शायद ही कोई शख्स होगा जिसे इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है.
– आजकल बच्चों का आकलन परीक्षा के नतीजों तक ही सीमित हो गया है. परीक्षा में अंकों के अलावा भी बच्चों में कई ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें अभिभावक देख नहीं पाते. परीक्षा एक प्रकार से लंबी जिंदगी जीने का अवसर है. समस्या तब होती है, जब हम परीक्षा को जीवन-मरण का सवाल बना देते हैं. परीक्षा के नतीजों से बच्चों की प्रतिभा का आकलन नहीं करना चाहिए. सफल व्यक्ति हर विषय में पारंगत नहीं होता. वह किसी एक विषय में एक्सपर्ट बनता है.
अभिभावकों को उन्होंने कहा -पेरेंट्स को बच्चों के साथ अधिक समय बिताना चाहिए. उन्हें घर में तनावमुक्त माहौल देना चाहिए. परीक्षा जीवन में महज एक पड़ाव है. यह सब कुछ नहीं है. इसे लेकर डरने की कोई जरूरत नहीं है.
प्रधानमंत्री मोदी ने परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम की तिथि की घोषणा सोमवार को ट्वीट कर की थी. उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “एक नया प्रारूप, विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला पर कई दिलचस्प प्रश्न और हमारे बहादुर योद्धाओं, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ एक यादगार चर्चा … . सात अप्रैल को शाम सात बजे देखिए `परीक्षा पे चर्चा. प्रधानमंत्री ने इसके साथ ही एक वीडियो भी साझा किया जिसमें वह कह रहे हैं, “हम बीते एक साल से कोरोना के साये में रह रहे हैं और इसकी वजह से मुझे व्यक्तिगत रूप से आपसे मिलने का मोह छोड़ना होगा और नए प्रारूप में `परीक्षा पे चर्चा के पहले डिजिटल संस्करण में आपके साथ रहूंगा. ”

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