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गंभीर कोरोना पीड़ितों को अस्पताल ने दिया दूसरा जीवन…

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डां तंजीम आजमी, ऊनैजा आजमी, कपील शेंडे समेत हमराह स्टाफ ने किया सफल इलाज
बालाघाट . बढ़ते कोरोना वायरस की भयावह स्थिति देखकर आमजन का जीना दूभर हो गया है. जान आफत में आ गई है. जिधर देखो उधर त्राहिमाम- त्राहिमाम मचा हुआ है. अस्पतालों में जगह खाली नहीं है. चिकित्सकों को कोरोना वायरस के नए-नए लक्षणों के कारण कोई उपयुक्त इलाज नहीं सूझ रहा है. अब करें तो क्या करें! बावजूद डॉक्टरों ने हिम्मत नहीं हारी और गंभीर से गंभीर कोरोना मरीजों का बेहतर से बेहतर उपचार किया. दुवाओं और दवा के सहारे इन्हीं ईश्वर रूपी चिकित्सकों ने लाखों लोगों की जान बचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी. कवायद में बीते माह मध्यप्रदेश, बालाघाट जिला निवासी एक दंपत्ति श्रीमती रितु क्षीरसागर और भरत लाल क्षीरसागर को कामठी, नागपुर में मौजूद सिटी हास्पिटल इन गंभीर कोरोना पीड़ितों को दूसरा जीवन दिया. यह कहें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. जहां दिन-रात मेहनत कर डां तंजीम आजमी, डां ऊनैजा आजमी, डां कपील शेंडे समेत हमराह स्टाफ ने जिंदादिली से सफल इलाज किया. नतीजतन इनकी खिल-खिलाते हुए सकुशल घर वापसी हुई. इस बात की जानकारी देते हुए श्रीमती रितु क्षीरसागर और भरत लाल क्षीरसागर सहित समूचे परिजनों ने सिटी अस्पताल, कामठी प्रबंधन का तहेदिल से शुक्रिया अदा किया. इतर बालाघाट जिला ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र प्रांत के कोने-कोने से आए लोगों को कोरोना से निजात दिलाने में सिटी अस्पताल अहम जिम्मेदारी निभा रहा है. जिसकी जितनी भी तारीफ की जाए उतनी ही कम होगी.
62 ऑक्सीजन लेवल, 28 दिन वैंटीलेटर में भर्ती
मामले में अपनी आप बीती बताते हुए कोरोना संक्रमण को मात देकर स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रही श्रीमती रितु क्षीरसागर ने कहा कि मैंने तो जीने की उम्मीद ही छोड़ दी थी, लेकिन सिटी अस्पताल, कामठी के जीद के आगे कोरोना हारा और मैं जिंदगी की जंग जीती. यह यहां के डाक्टरों और उसके स्टाफ का ही कमाल है कि 62 जैसे कम ऑक्सीजन लेवल के साथ 28 दिन वैंटीलेटर में भर्ती रहने के बाद भी मुझे मौत के मुंह से वापस लाया गया. उन्होंने आगे कहा कि अस्पताल प्रबंधन ने एक परिवार की तरह अपने सफलता पूर्वक उपचार से मेरी भरपूर सेवा की. ये मेरे लिए परवर दीगार से कम नहीं है. वहीं इसी अस्पताल में कोरोना का डटकर मुकाबला करने वाले भरत लाल क्षीरसागर ने कहा कि मैं अब पहले जैसे ठीक हूं. अपने कामकाज को अच्छे से निर्वहन कर पा रहा हूं. ये सब कुछ मुमकिन हुआ सिटी अस्पताल, कामठी के अथक प्रयासों से, जिसे मैं शब्दों में बखान नहीं कर सकता.
स्वस्थ भारत, कोरोना मुक्त भारत
सिलसिले में इन्होंने अपनी मुंह जुबानी में सिटी अस्पताल प्रबंधन के सांगोपांग योगदान के प्रति शुक्रगुजार होते हुए बयां कि कोरोना से डरना नहीं वरन् लड़ना होगा. साथ ही दवाई, वैक्सीनेशन, दो गज की दूरी, मास्क लगाना और बार-बार हाथ धोना जरूरी है के नियमों का कड़ाई से पालन हर हाल में करना होगा. तभी हम अपने और अपनों को सुरक्षित रख सकते हैं. येही संकल्पना स्वस्थ भारत, कोरोना मुक्त भारत का मूलमंत्र बनेगी. आइऐ, हम सब मिलकर सरकार और डॉक्टरों के दिशा-निर्देशों की ईमानदारी से अनुपालन करें, ऐसी गुजारिश आप सभी से हैं.

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