Uttar Pradesh

लोस चुनाव : प्रतापगढ़ में कौन होगा निस्तेज और किसका बढ़ेगा प्रताप!

लोकसभा-प्रतापगढ़

लखनऊ, 20 मई (Udaipur Kiran) । प्रतापगढ़ जिला स्वामी करपात्री जी की जन्मभूमि और महात्मा बुद्ध की तपोस्थली है। यह धरती रीतिकाल के महान कवि आचार्य भिखारी दास और हिंदी के प्रख्यात कवि हरिवंश राय बच्चन की जन्मस्थली की वजह से भी जानी जाती है। प्रतापगढ़ के विधानसभा क्षेत्र पट्टी से ही पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने पदयात्रा के जरिए अपना राजनीतिक करियर शुरू किया था। उप्र की संसदीय सीट संख्या 39 प्रतापगढ़ में छठे चरण के तहत 25 मई को मतदान होगा।

प्रतापगढ़ संसदीय सीट का इतिहास

प्रतापगढ़ लोकसभा सीट पर अब तक 17 बार चुनाव हुए हैं। जिसमें से 10 बार कांग्रेस को जीत मिली है। जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सिर्फ 2 बार और समाजवादी पार्टी (सपा) को एक बार जीत हासिल हुई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का अब तक यहां खाता नहीं खुला। इस सीट पर राजघराने का असर रहा है। दिग्गज नेता राजा दिनेश सिंह इस सीट से 4 बार सांसद चुने गए थे।

इस सीट पर पहली बार साल 1952 में वोट डाले गए। जिसमें कांग्रेस के मुनीश्वर दत्त उपाध्याय ने जीत दर्ज की। साल 1962 के आम चुनाव में भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार अजीत प्रताप सिंह विजयी हुए। कांग्रेस उम्मीदवार दिनेश सिंह ने साल 1967 और साल 1971 आम चुनाव में जीत दर्ज की। साल 1998 में भाजपा को पहली बार इस सीट पर जीत मिली। पार्टी उम्मीदवार राम विलास वेदांती ने कांग्रेस उम्मीदवार को हरा दिया। साल 2004 आम चुनाव में पहली बार इस सीट से सपा उम्मीदवार अक्षय प्रताप सिंह सांसद चुने गए। साल 2014 आम चुनाव में अपना दल के हरिवंश सिंह सांसद बने। जबकि साल 2019 में भाजपा के संगम लाल गुप्ता ने जीत दर्ज की।

पिछले दो चुनावों का हाल

2019 के आम चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संगम लाल गुप्ता ने बसपा के अशोक त्रिपाठी को परास्त किया था। जीत का अंतर 1 लाख 17 हजार वोट का था। संगम लाल को कुल 436,291 (47.37 प्रतिशत) वोट मिले जबकि अशोक त्रिपाठी को 318,539 (34.8 प्रतिशत) वोट प्राप्त हुए थे। कांग्रेस प्रत्यााशी राजकुमारी रत्ना सिंह को 77,096 (8.42 प्रतिशत) वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत जब्त हुई।

बात 2014 के चुनाव की कि जाए तो इस चुनाव में भाजपानीत एनडीए में शामिल अपना दल सोनेलाल की टिकट पर कुंवर हरिवंश सिंह में उतरे। हरिवंश ने चुनाव में 375,789 (42.01 प्रतिशत) वोट हासिल किए। बसपा के प्रत्याशी आसिफ निजामुद्दीन सिद्दीकी को 207,567 (23.20 प्रतिशत) वोट मिले। करीब 1.70 लाख वोट के अंतर से कुंवर हरिवंश विजयी हुए। कांग्रेस प्रत्याशी रत्ना सिंह तीसरे और सपा के प्रमोद कुमार सिंह तीसरे और चौथे नंबर पर रहे।

किस पार्टी ने किसको बनाया उम्मीदवार

भाजपा ने मौजूदा सांसद संगम लाल गुप्ता को दोबारा मैदान में उतारा है। कांग्रेस और सपा गठबंधन में ये सीट सपा के खाते में है। सपा की ओर से शिवपाल सिंह पटेल (डा0 एस0पी0 सिंह) मैदान में हैं। वहीं बसपा की ओर से प्रथमेश मिश्रा ‘सेनानी’चुनौती दे रहे हैं। चुनाव में मैदान में कुल 26 प्रत्याशी हैं, जिसमें 10 निर्दलीय हैं।

प्रतापगढ़ सीट का जातीय समीकरण

प्रतापगढ़ संसदीय सीट पर करीब 18.30 लाख मतदाता हैं। आंकड़ों के मुताबिक प्रतापगढ़ में करीब 11 प्रतिशत कुर्मी वोटर हैं। इसके अलावा करीब 16 प्रतिशत ब्राह्मण और 8 प्रतिशत क्षत्रिय वोटर हैं। 19 प्रतिशत एससी-एसटी, 15 प्रतिशत मुस्लिम और करीब 10 प्रतिशत यादव वोटर हैं।

विधानसभा सीटों का हाल

प्रतापगढ़ लोकसभा सीट के तहत 5 विधानसभा सीटें शामिल है। इसमें रामपुर खास, विश्वनाथगंज,प्रतापगढ़,पट्टी और रानीगंज शामिल हैं। रामपुर खास कांग्रेस, विश्वनाथगंज से अपना दल सोनेलाल और प्रतापगढ़ में भाजपा का कब्जा है। पट्टी और रानीगंज सीट पर सपा काबिज है।

जीत का गणित और चुनौतियां

प्रतापगढ़ सीट पर कुर्मी और मुस्लिम मतदाताओं की बहुलता है। लेकिन इस सीट पर राजपूतों का दबदबा रहा है। इस सीट पर सबसे ज्यादा बार राजपूत उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। प्रतापगढ़ लोकसभा सीट के तहत आने वाली पांच विधानसभा सीटों में चार पर कुर्मी-मौर्य बिरादरी के विधायक हैं। इसमें दो सीटें सपा के पास है। यह इस सीट पर कुर्मी बिरादरी के सियासी असर को दिखाता है। रामपुर खास सीट से कांग्रेस का विधायक है। कुर्मी मतदाताओं की ज्यादा तादाद की वजह से यहां कुर्मी मतदाताओं पर हर दल भरोसा कर रहा है। यही वजह है कि सपा और एनडीए दोनों अपनी ताकत दिखाने में जुटी हुई हैं। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के नेता रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का यह प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के नेता रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का यह प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। राजा भैया ने इस चुनाव में न्यूट्रल रहने का ऐलान किया है। इससे भाजपा और सपा दोनों की मुश्किलें बढ़ी हैं। वैसे राजा भैया का झुकाव सपा प्रत्याशी की ओर दिखाई देता है।

राजनीतिक विशलेषक जेपी गुप्ता के अनुसार, प्रतापगढ़ में राजा भैया का न्यूट्रल रहना भाजपा की परेशानी बढ़ाएगा। बसपा जितना सपा के वोट बैंक में सेंधमारी करेगी भाजपा उतना ज्यादा जीत के करीब होगी। यहां भाजपा और सपा के बीच कांटे की टक्कर है।

प्रतापगढ़ से कौन कब बना सांसद

1952 मुनीश्वर दत्त उपाध्याय (कांग्रेस)

1957 मुनीश्वर दत्त उपाध्याय (कांग्रेस)

1962 अजीत प्रताप सिंह (जनसंघ)

1967 राजा दिनेश सिंह (कांग्रेस)

1971 राजा दिनेश सिंह (कांग्रेस)

1977 रूपनाथ सिंह यादव (भारतीय लोकदल)

1980 अजीत प्रताप सिंह (कांग्रेस आई)

1984 राजा दिनेश सिंह (कांग्रेस)

1989 राजा दिनेश सिंह (कांग्रेस)

1991 अभय प्रताप सिंह (जनता दल)

1996 राजकुमारी रत्ना सिंह (कांग्रेस)

1998 राम विलास वेदांती (भाजपा)

1999 राजकुमारी रत्ना सिंह (कांग्रेस)

2004 अक्षय प्रताप सिंह गोपाल जी (सपा)

2009 राजकुमारी रत्ना सिंह (कांग्रेस)

2014 कुंवर हरिवंश सिंह (अपना दल सोनेलाल)

2019 संगम लाल गुप्ता (भाजपा)

(Udaipur Kiran) /डॉ.आशीष वशिष्ठ/राजेश

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