Uttar Pradesh

हुरियारिनों की लाठियों की चोट पर झिलमिलाएगी एलईडी व एयरबैग ढाल

फाइल फोटो लठामार होली का इंसेट में सैनी का परिवार तैयार ढाल को फाइनल टंच देता हुआ रमेश सैनी का पुत्र 

तीन पीढ़ियों से बना रहा है सैनी परिवार ढाल

मथुरा, 08 मार्च (Udaipur Kiran) । बरसाना की लठामार होली में युवाओं को लुभाने के लिए ढाल बनाने वालों ने एलईडी और एयरबैग वाली ढालें बनाना शुरू कर दिया है। ये ढालें देखने में सुंदर होने के साथ सुरक्षित हैं, खास बात यह है कि अब इनमें किसी जानवर के चमड़े का प्रयोग भी नहीं किया जा रहा है।

बरसाना कस्बे के ढाल बनाने वाले रमेश सैनी ने बताया कि इस बार उसने खास एलईडी ढाल बनाई है। इस ढाल की विशेषता यह है कि इसमें लाठी की चोट पड़ते ही एलईडी लाइटें जगमगाना शुरू कर देंगी। संध्या के समय लठामार के दौरान जब सूर्य अस्तांचल की ओर होगा और रोशनी कम हो जाएगी, इन ढालों की जगमगाहट सबकों लुभाएगी।

एक अन्य तरह की ढाल भी रमेश सैनी ने बनाई है जो एयरबैग की तरह होगी। इस ढाल में रबड़ के एक ट्यूब के अंदर हवा भरी होगी, जिसके कारण लाठी की भरपूर चोट का जोर हुरियारे पर नहीं पड़ेगा और लठ हवा के दबाव से तेजी से पीछे की ओर लौट जाएगा।

रमेश सैनी के पिता नन्नूराम सैनी भी ढाल बनाने का काम करते थे। इस वर्ष रमेश को बीस ढाल बनाने का काम मिल चुका है, लठामार होली तक यह संख्या और भी बढ़ सकती है। इस समय ढाल बनाने के लिए पहले की तरह चमड़े का प्रयोग नहीं किया जाता है। चमड़े के स्थान पर रबड़ की मोटी चादर का प्रयोग किया जाता है। सादा ढाल की कीमत ढाई हजार रुपये है और एयरबैग वाली ढाल की कीमत तीन हजार रुपये है। एलईडी ढाल की कीमत साढे तीन हजार रुपए है।

(Udaipur Kiran) /महेश/राजेश

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