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भारतीय जीवन बीमा निगम को निर्देश : दावा राशि लाख सोलह रुपये पैंतालीस दिन में अदा करें

भारतीय जीवन बीमा निगम को निर्देश

जोधपुर 7 मार्च (Udaipur Kiran) । स्थाई लोक अदालत, जोधपुर ने अपने निर्णय में यह व्यवस्था दी है कि चिकित्सकीय जांच रपट प्राप्ति के बाद ही डॉक्टरी परामर्श से ही रोग के लक्षण की जानकारी को माना जा सकता है। अदालत के अध्यक्ष सुकेश कुमार जैन और सदस्य जेठमल पुरोहित तथा माणकलाल चांडक ने प्रकरण मंजूर करते हुए भारतीय जीवन बीमा निगम को निर्देश दिए कि प्रार्थी को दावा राशि 16 लाख रुपये, द्वितीय प्रीमियम किस्त 3824 रुपये मय 8 फीसदी ब्याज और वाद व्यय पांच हजार रुपये 45 दिन में अदा करें।

एर्नाकुलम केरल रहवासी दामोदर बागड़ी ने अधिवक्ता अनिल भंडारी के माध्यम से प्रकरण पेश कर कहा कि उन्होंने निगम से कैंसर कवर बीमा पॉलिसी सोलह लाख रुपये की 22 जनवरी 2018 से तीस साल की करवाई थी। उन्हें बेक पेन होने पर कोच्चि के एस्टर मेडसिटी अस्पताल में दिखाए जाने पर 23 जुलाई 2018 को पीइटीसीटी जांच की गई और उसकी रपट 24 जुलाई को जारी हुई। जीवन बीमा निगम ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि प्रार्थी को कैंसर रोग की जानकारी 19 जुलाई को ही हो गई और बीमा पॉलिसी में 180 दिन की प्रतीक्षा अवधि पूर्ण नहीं हुई है। अधिवक्ता भंडारी ने कहा कि अस्पताल के कुछ कागजों में सहवनवश 19 जुलाई अंकित कर दी, जबकि हकीकत यह है कि मरीज का जांच अन्वेषण 23 जुलाई को ही किया गया और उसकी रपट 24 जुलाई को जारी होने से रोग का लक्षण इससे पूर्व होना नहीं माना जा सकता और यह अवधि पॉलिसी जारी होने के 180 दिन के बाद होने से प्रकरण मंजूर किया जाएं। बीमा निगम की ओर से कहा गया कि मरीज ने अस्पताल में 19 जुलाई को दिखाया था और उसी दिन जांच रपट जारी होने से दावा सही खारिज किया गया है।

स्थाई लोक अदालत ने प्रकरण मंजूर करते हुए कहा कि प्रार्थी की जांच 23 जुलाई को होने और जांच रपट 24 जुलाई को जारी होने से कैंसर का लक्षण बीमा पॉलिसी की प्रतीक्षा अवधि 21 जुलाई को समाप्त होने से प्रार्थी अपना अनुतोष निगम से प्राप्त करने का हकदार है। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रबंधन ने पत्र के जरिए कैंसर लक्षण की तारीख 19 जुलाई को गलत अंकन किया जाना स्वीकार किया है। उन्होंने भारतीय जीवन बीमा निगम को निर्देश दिया कि प्रार्थी को 45 दिन में दावा राशि 16 लाख रुपये, जमा कराई गई द्वितीय प्रीमियम किस्त 3824 रुपये मय 8 फीसदी ब्याज और परिवाद व्यय पांच हजार रुपये अदा करें।

(Udaipur Kiran) /संदीप

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