Uttar Pradesh

लोस चुनाव : हैट्रिक लगाकर भाजपा बनेगी सुल्तानपुर की सुल्तान!

लोकसभा सीट-सुलतानपुर

लखनऊ, 20 मई (Udaipur Kiran) । पौराणिक मान्यता है कि सुल्तानपुर जिले को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के पुत्र कुश द्वारा बसाया गया कुश भवनपुर नाम का नगर था। यह धरती दुर्वासा ऋषि, महर्षि वाल्मीकि और महर्षि वशिष्ठ जैसे कई महान ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रही है। देश और प्रदेश की राजनीति में सुल्तानपुर की अहम भूमिका रही है। पिछले एक दशक से इस सीट पर भाजपा काबिज है। उप्र की संसदीय सीट संख्या 38 सुल्तानपुर में छठे चरण के तहत 25 मई को मतदान होगा।

सुल्तानपुर संसदीय सीट का इतिहास

अवध क्षेत्र में गोमती किनारे बसे सुल्तानपुर संसदीय सीट पर लंबे समय तक कांग्रेस का कब्जा रहा है। लेकिन रायबरेली और अमेठी की तरह कभी इस सीट को वीवीआईपी सीट का दर्जा नहीं मिल पाया। इस सीट पर कांग्रेस ने आठ बार जीत हासिल की है। जबकि भाजपा को पांच बार जीत मिली है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को दो बार और जनता दल को एक बार जीत मिली है। लेकिन समाजवादी पार्टी (सपा) इस सीट पर अपनी जीत नहीं दर्ज कर सकी।

इस सीट पर पहली बार 1951-52 के चुनाव में वोटिंग हुई थी। उस चुनाव में कांग्रेस के बी0वी0 केसकर ने जीत दर्ज की थी। 1952 से 1971 के चुनाव में लगातार कांग्रेस यहां से लगातार जीती। सुल्तानपुर लोकसभा सीट पर भाजपा को पहली बार साल 1991 में जीत मिली। पार्टी उम्मीदवार विश्वनाथ दास शास्त्री ने जीत हासिल की। इसके बाद साल 1996 और 1998 में भाजपा के देवेंद्र बहादुर राय विजयी हुए। 1999 और 2004 में बसपा ने यहां जीत का परचम लहराया। साल 2009 में कांग्रेस यहां से जीती। भाजपा की टिकट पर वरुण गांधी ने साल 2014 और मेनका गांधी ने साल 2019 में इस सीट से सांसद चुने गए थे।

पिछले दो चुनावों का हाल

2019 के आम चुनाव में भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी ने बसपा के चंद्रभद्र सिंह को परास्त किया था। मेनका गांधी को कुल 459,196 (45.88 प्रतिशत) वोट मिले जबकि चंद्रभद्र सिंह को 444,670 (44.432 प्रतिशत) वोट प्राप्त हुए थे। कांटेदार मुकाबले में मेनका ने महज 14,526 मतों के अंतर से यह जीत अपने नाम की थी। कांग्रेस प्रत्यााशी डॉ. संजय सिंह को 41,981 (4.16 प्रतिशत) वोट मिले। कांग्रेस प्रत्याशी अपनी जमानत जब्त होने से बचाने में विफल रहा।

इससे पहले 2014 के चुनाव में भाजपा की टिकट पर वरुण गांधी मैदान में उतरे। वरुण ने चुनाव में 410,348 (42.51 प्रतिशत) वोट हासिल किए और बसपा के प्रत्याशी पवन पांडे को 178,902 मतों के अंतर से हरा दिया। पवन पांडे को 231,446 (23.98 प्रतिशत) वोट हासिल हुए। सपा के टिकट पर मैदान में उतरे शकील अहमद 228,144 (23.63 प्रतिशत) तीसरे स्थान पर रहे थे। कांग्रेस की अमिता सिंह 41,987 (4.35 प्रतिशत) वोट हासिल कर चौथे स्थान पर रहीं।

किस पार्टी ने किसको बनाया उम्मीदवार

भाजपा ने मौजूदा सांसद मेनका संजय गांधी को मैदान में उतारा है। कांग्रेस और सपा गठबंधन में ये सीट सपा के खाते में है। सपा की ओर से रामभुआल निषाद चुनावी समर में उतरे हैं। वहीं बसपा की ओर से उदराज वर्मा चुनौती दे रहे हैं। चुनाव में मैदान में कुल 09 प्रत्याशी हैं, जिसमें 2 निर्दलीय हैं।

सुल्तानपुर सीट का जातीय समीकरण

लगभग 18.5 लाख वोटरों वाले सुल्तानपुर संसदीय क्षेत्र में 80 फीसदी आबादी हिंदू है। जबिक 20 फीसदी मुस्लिम वोटर्स हैं। इस लोकसभा सीट पर अनुसूचित जाति की आबादी 21.29 फीसदी है और अनुसूचित जनजाति की आबादी 0.02 फीसदी है। इस सीट पर मुस्लिम, राजपूत और ब्राह्मण वोटर्स की संख्या भी काफी तादाद में है। ये वोटर्स इस सीट पर हार-जीत का समीकरण बनाते हैं।

विधानसभा सीटों का हाल

सुल्तानपुर लोकसभा सीट के तहत 5 विधानसभाएं आती हैं। इसमें इसौली, सुल्तानपुर, सुल्तानपुर सदर, लम्भुआ और कादीपुर (सु0) शामिल हैं। इसौली सीट सपा और बाकी चार सीटों पर भाजपा काबिज है।

जीत का गणित और चुनौतियां

भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी के मुकाबले सपा और बसपा ने कोई बड़ा चेहरा नहीं उतारा है। सपा ने तो एक बार बसपा सरकार में मंत्री रह चुके रामभुआल निषाद पर दांव लगाया है। किंतु बसपा ने तो ऐसे युवा को मैदान में उतार दिया है। जिसने लोकसभा तो दूर विधानसभा तक का चुनाव नहीं लड़ा है। उन्होंने अब तक केवल जिला पंचायत सदस्य का ही चुनाव लड़ा है। बसपा ने कुर्मी उम्मीदवार उतारकर भाजपा के वोट बैंक में सेंधमारी का प्लान बनाया है। दलित और कुर्मी के वोटों के साथ उसे उम्मीद है कि मुस्लिम समुदाय भी उसे जमकर वोट करेंगे। सपा ने निषाद प्रत्याशी को उतारकर लड़ाई को आक्रामक बना दिया है। सुल्तानपुर जिले में बड़ी संख्या में निषाद मत गठबंधन को मिलने का दावा किया जा रहा है। यदि ऐसा हुआ तो मुस्लिम और यादव मतों का सपा के पक्ष में होना तय माना जा रहा है।

राजनीतिक विशलेषक सुशील शुक्ल के अनुसार, सुल्तानपुर में लड़ाई त्रिकोणीय और दिलचस्प तो हैं, लेकिन राम मंदिर, डबल इंजन की सरकार के विकास कार्यों के अलावा मेनका गांधी की छवि यहां प्रभावी दिखाई देती है।

सुल्तानपुर से कौन कब बना सांसद

1952 बी0वी0 केसकर (कांग्रेस)

1957 गोविन्द मालवीय (कांग्रेस)

1962 कुंवर कृष्णा (कांग्रेस)

1967 गणपत सहाय (कांग्रेस)

1971 केदारनाथ सिंह (कांग्रेस)

1977 जुल्फिकारुल्ला (भारतीय लोकदल)

1980 गिरिराज सिंह (कांग्रेस आई)

1984 राजकुमार सिंह (कांग्रेस)

1989 राम सिंह (जनता दल)

1991 विश्वनाथ दास शास्त्री (भाजपा)

1996 देवेन्द्र बहादुर राय (भाजपा)

1998 देवेन्द्र बहादुर राय (भाजपा)

1999 जयभद्र सिंह (बसपा)

2004 मोहम्मद ताहिर (बसपा)

2009 डॉ. संजय सिंह (कांग्रेस)

2014 फिरोज वरुण गांधी (भाजपा)

2019 मेनका संजय गांधी (भाजपा)

(Udaipur Kiran) / डॉ. आशीष वशिष्ठ/राजेश

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