Uttar Pradesh

अभाविप के कार्यकर्ताओं की हुंकार-पांचवे दिन शुरु होगा आमरण अनशन

प्रदर्शन करते अभाविप के कार्यकर्ता
प्रदर्शन करते अभाविप के कार्यकर्ता

झांसी,10 मार्च (Udaipur Kiran) । अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से बुंदेलखंड विश्वविद्यालय परिसर में चल रहा अनशन आज चौथे दिन भी जारी रहा। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा शिक्षक भर्ती में अनियमितता तथा वित्तीय गड़बड़ियों की जांच की मांग पर विश्वविद्यालय द्वारा विचार न करना अत्यंत खेद जनक है। विश्वविद्यालय प्रशासन की संवाद हीनता से छात्रों तथा कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। अभाविप पांचवे दिन सोमवार को आमरण अनशन की तैयारी में जुटी है। हालांकि इस बीच शिक्षक विधायक डा बाबूलाल तिवारी ने भी विद्यार्थियों से भेंटकर उनकी समस्याओं को जानने का प्रयास किया।

अभाविप ने सोमवार तक भर्ती प्रक्रिया के स्थगन के संबंध में निर्णय न लेने की स्थिति में क्रमिक अनशन को आमरण में परिवर्तित करने की बात कही है। आंदोलन के गति पकड़ने के साथ ही नित्य नए-नए मामले प्रकाश में आ रहे हैं। कार्य परिषद के सदस्य डॉ अभिलाष कुमार ने भी इसी प्रकरण को लेकर कार्य परिषद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि विश्वविद्यालय ने नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से नियुक्तियां की है।

राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मनेंद्र सिंह ने कहा कि एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि डॉ सुनील तिवारी के शिकायती पत्र पर संज्ञान लेते हुए कुलाधिपति कार्यालय द्वारा 4 मार्च 2024 को जारी पत्र की भी अनदेखी की जा रही है। विधायक जवाहर राजपूत द्वारा परिणाम घोषणा से पूर्व उद्घाटित किए गए पांच नाम में से चार नाम का चयन होना चयन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार को प्रमाणित करता है।

आंदोलन के बढ़ने के साथ ही भ्रष्टाचार के पर पर्दा डालने के कई प्रकरण विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा में है। विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी के दायित्व का निर्माण कर रहे शिक्षक पर परिसर के ही कर्मचारियों ने प्रशासनिक अनियमितता एवं वित्तीय भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए एक पत्र राज्यपाल व कुलाधिपति को 2021 में भेजा गया था, जिस पर कुलाधिपति कार्यालय से संपूर्ण प्रकरण की जांच आख्या मांगी गई थी।

इस प्रकरण में विश्वविद्यालय द्वारा गठित चार सदस्यीय जांच समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उक्त शिक्षक से संपत्ति अधिकारी का दायित्व वापस लेने की सिफारिश की थी। परंतु 2 वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी स्थिति यथावत है। इसी समिति ने प्रशासनिक दक्षता तथा वित्तीय अनुशासन के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की थीं। इस रिपोर्ट की अधिकांश सिफारिशों का आज तक विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अनुपालन नहीं किया गया है।

इकाई अध्यक्ष हर्ष शर्मा ने कहा कि विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता पिछले चार दिनों से दिन-रात विश्वविद्यालय परिसर में अपने अनशन स्थल पर ही रह रहे हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन के भ्रष्टाचार से लड़ाई जारी है।

महानगर मंत्री सुयश ने कहा कि कार्य परिषद के एक सदस्य ने कल होनी वाली बैठक का बहिष्कार किया है और शिक्षा नियुक्तियों में होने वाले भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं की भी जांच की मांग की है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य उर्मिला ने कहा कि शिक्षक भर्ती को रद्द कर पुन: जांच कमेटी इस विषय को संज्ञान में लेकर निष्पक्षता जांच करें, जिससे योग्यवान शिक्षकों को अवसर मिले। इकाई मंत्री निषेंद्र राजपूत ने कहा कि हमारा यह अनशन बुंदेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार से है की और हमने ठाना है कि विश्वविद्यालय में अब भ्रष्टाचारियों को विश्वविद्यालय से बाहर का रास्ता दिखाएंगे।

पूर्व ई. अध्यक्ष विकास ने बताया कि विद्यार्थी परिषद् ने अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन स्थल पर ही परिषद ने छात्रवृत्ति हेल्पडेस्क लगाया है। जिसमें विद्यार्थियों के विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर से जो फॉर्म फॉरवर्ड नहीं किए गए हैं जिसमें विश्वविद्यालय महाविद्यालय स्तर से उनकी लापरवाही के कारण फॉरवर्ड नहीं हुई है इसके लिए फॉर्म एकत्र कर रहा है जिसका जवाब विश्वविद्यालय प्रशासन को देना होगा।

बुवि प्रशासन जल्द समाप्त कराए अनशन

अनशन के चौथे दिन रविवार को शिक्षक विधायक डा. बाबूलाल तिवारी विश्वविद्यालय परिसर में धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने विद्यार्थियों की पीड़ा सुनी। उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है कि पिछले तीन दिनों से विद्यार्थी विश्वविद्यालय में समस्याओं को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन बुवि प्रशासन के किसी भी व्यक्ति द्वारा भौतिक रुप से उनसे मिलकर उनकी समस्याओं के बारे में नहीं पूछा गया। उन्होंने कहा कि बुवि प्रशासन को जल्द ही उनसे मिलकर उनकी समस्याओं का निस्तारण करना चाहिए।

(Udaipur Kiran) /महेश/राजेश

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