भीण्डर (उदयपुर). उदयपुर जिले के भीण्डर नगर से कीर की चौकी रोड पर हींता गांव में स्थित हैं चामुण्डा माता का शक्तिपीठ। यह शक्तिपीठ क्षेत्र का सबसे पुराना करीब 1400 वर्ष पहले स्थापित हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार यहां पहले जैन समाज अपने भगवान की स्थापना के लिए मन्दिर का निर्माण करवाया, लेकिन यहां चामुण्डा माता की स्थापना हो जाने बाद जैन समाज ने भी शक्तिपीठ के रूप में स्वीकार कर दिया। जानकारों की माने तो हींता गांव भीण्डर से भी पुराना हैं और बड़ा गांव होने के संकेत है। भीण्डर से 5 किमी की दूरी पर स्थित हींता गांव में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ चामुण्डा माता मन्दिर में विकास का काम लगातार जारी है। यहां प्रति महीने दानपात्र से प्राप्त होने वाली रकम भीण्डर क्षेत्र के समस्त मन्दिरों से ज्यादा है। वहीं दानपात्र से प्राप्त होने वाली रकम से पिछले 13-14 वर्षों में करोड़ों रुपए का विकास कार्य हुआ है। यहां पर सांवरिया सेठ में बने मन्दिर के जैसे पत्थर से ही मन्दिर का जीर्णोद्धार किया गया।
दो शिलालेख
शक्तिपीठ में मातारानी की पूजा-अर्चना गिरी-गोस्वामी परिवार के हाथ में है। यह परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी सैकड़ों वर्षों से अनवरत पूजा-अर्चना करता आ रहा है। मन्दिर में शेर का पत्थर पर बना हुआ पंजा और मातारानी के पैर का निशान भी है। वहीं दो शिलालेख भी स्थापित हैं जिसमें एक शिलालेख बहुत ज्यादा पुराना होने से जानकारी जुटाना मुश्किल हुआ, लेकिन दूसरे शिलालेख से यह स्पष्ट जरूर हुआ कि 800 वर्ष पहले इस मन्दिर में कुछ निर्माण करवाने का उल्लेख है।
जीर्णोद्धार के बाद बदल गया मंदिर का स्वरूप
वर्तमान में मन्दिर समिति अध्यक्ष किशनलाल अहीर, सचिन बगदीलाल चौबीसा, हींता सरपंच माधवलाल अहीर एवं पूजारी राजूपूरी गोस्वामी ने बताया कि यहां मन्दिर समिति विकास के लिए लगातार प्रयासरत है। मन्दिर का पुन: निर्माण का काम वर्ष 2007 से शुरू किया गया, जिसमें मन्दिर का रूप ही बदल दिया। मन्दिर के आसपास भोजनशाला, पार्क आदि विकास कार्य हुए। बीते 13-14 वर्षों में मन्दिर में करीब सवा दो करोड़ रुपए व्यय हो चुके है।

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