उदयपुर. 21 व 22 अक्टूबर, 1948 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज है। भारत की आजादी के एक साल बाद ये दो दिन देश के पहले गवर्नर जनरल सी. राजगोपालाचारी ने उदयपुर में बिताए थे। सी. राजगोपालाचारी को राजाजी कहकर संबोधित किया जाता था। राजाजी जी उस समय विमान के जरिये 21 अक्टूबर को दिल्ली से उदयपुर पहुंचे थे। यहां से वे 22 अक्टूबर को विमान से ही फिर दिल्ली के लिए रवाना हुए। लेकिन, उनकी ये उदयपुर यात्रा हमेशा के लिए यादगार बन गई।

मानपत्र व चांदी का चित्तौड़ का किला किया भेंट

महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल पब्लिकेशन ट्रस्ट की हकीकत बहिड़ा: महाराणा श्री भूपालसिंह सन 1930 से 1955 भाग-3 पुस्तक से मिली जानकारी के अनुसार, 21 अक्टूबर 1948 को देश के पहले गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राज गोपालाचारी उदयपुर आए थे। तब वे हवाइ पट्टी पर विमान से उतरे। उन्हें लेने तत्कालीन मुख्यमंत्री माणिक्यलाल वर्मा, उनके एडवाइजर पिल्लई व सिटी पैलेस से महाराणा के निजी सचिव शार्दुल सिंह पहुंचे। इतिहासकार डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू के अनुसार 1948 में सज्जननिवास (गुलाबबाग) उद्यान में जनसभा भी हुई, जहां राजाजी ने संबोधित किया और उनके भाषण का तत्काल अनुवाद महारावल लक्ष्मणसिंह ने किया। सिटी कॉरपोरेशन (म्यूनिसिपल) की ओर से राज गोपालाचारी को मानपत्र व चांदी का चित्तौड़ का किला भेंट किया। इस दिन वे लक्ष्मी विलास में महाराणा भूपालसिंह के निमंत्रण पर उनसे भी मिलने पहुंचे, जहां बेदला के राव मनोहरसिंह, सलूंबर के रावत, कानोड़ रावत, करजाली, शिवरती आदि इनके स्वागत व प्रोटोकॉल में रहे।

गोवर्धन विलास में शरणार्थियों से मिले और एमबी कॉलेज बॉयज हॉस्टल का किया शिलान्यास
राजगोपालाचारी उदयपुर में गोवर्धनविलास व प्रतापनगर में शरणार्थियों से मिले व बातचीत की। इसके बाद वे एमबी कॉलेज पहुंचे, जहां उन्होंने बॉयज हॉस्टल का शिलान्यास भी किया। अगले दिन 22 अक्टूबर को प्रतापनगर एयरोड्रम पर आए और यहां से वे विमान में बैठकर रवाना हो गए। इससे पहले 1943 में भी मेवाड़ के प्रधानमंत्री सर टी. विश्व राघवाचार्य के निमंत्रण पर सी. राजगोपालाचारी उदयपुर आए थे। इतिहासकार डॉ. जुगनू ने बताया कि 1948 में प्रतापनगर की हवाई पट्टी पर अस्थायी रूप से महत्वपूर्ण व्यक्तियों के विमान उतरने की व्यवस्था थी।

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