उदयपुर. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर रविवार को सुहाग का पर्व करवाचौथ मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिनें व नव विवाहिताएं दिनभर निर्जल रहकर पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए यह व्रत करेंगी। शाम को सोलह शृंगार कर चौथ माता की पूजा-अर्चना के बाद चांद को अघ्र्य देकर व्रत खोलेंगी। इसके बाद परिवार के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेंगी। शादी के बाद पहला करवा चौथ मनाने वाली नवविवाहिताओं के लिए यह पर्व खास रहेगा।

रोहिणी नक्षत्र में होगा पूजन

पं. जितेंद्र त्रिवेदी के अनुसार, करवा चौथ के दिन को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। करवा या करक मिट्टी के पात्र को कहते हैं जिससे चन्द्रमा को जल अर्पण किया जाता है। पूजा के दौरान करवा बहुत महत्वपूर्ण होता है और इसे ब्राह्मण या किसी योग्य महिला को दान में भी दिया जाता है। पं. जगदीश दिवाकर केअनुसार,करवा चौथ इस बार कई अच्छे संयोग है। खास बात यह है कि पांच साल बाद फिर इस करवा चौथ पर शुभ योग बन रहा है। करवा चौथ पर इस बार रोहिणी नक्षत्र में पूजन होगा तो वहीं रविवार का दिन होने की वजह से भी व्रती महिलाओं को सूर्यदेव का आशीर्वाद प्राप्त होगा। करवा चौथ के दिन मां पार्वती, भगवान शिव, कार्तिकेय एवं गणेश सहित शिव परिवार का पूजन किया जाता है। मां पार्वती से सुहागिनें अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।

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पार्लर्स में रही भीड़
बाजारों में एक दिन पूर्व तक करवा चौथ पर्व को लेकर खरीदारी होती रही। शहर के प्रमुख बाजार बापूबाजार, सूरजपोल, मालदास स्ट्रीट, घंटाघर, सिंधी बाजार आदि में कपड़ों, ज्वेलरी से लेकर सुहाग के सामान की खरीदारी की जा रही है। वहीं, रूप निखारने के लिए शहर के ब्यूटी पार्लर्स में भी विशेष भीड़ रही।

चतुर्थी तिथि

24 अक्टूबर प्रात: 3.01 मिनट से25 अक्टूबर प्रात: 5: 43 मिनट तक

चंद्रोदय : रात्रि 8.33 मिनट

पूजन के लिए शुभ मुहूर्त : शाम 06.55 से लेकर 08.51 तक रहेगा

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